साथी को बचाने नदी में कूदा अकरम, खुद जिंदगी की जंग हार गया

लखीमपुर खीरी , 59

पिपरा खुर्द में मातम, बहादुरी की मिसाल बना 19 वर्षीय युवक

लखीमपुर-खीरी के बिजुआ क्षेत्र की ग्राम पंचायत पिपरा खुर्द का 19 वर्षीय युवक अकरम अब इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी बहादुरी और इंसानियत की कहानी पूरे इलाके में लोगों की आंखें नम कर रही है। जिसने दोस्त की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी, वही खुद काल के गाल में समा गया।

बताया जा रहा है कि अकरम झांसी में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसके पिता पिछले करीब 20 वर्षों से वहीं कपड़ों का व्यापार करते हैं। अकरम उर्दू की तालीम हासिल कर रहा था और हाफिज बनने की पढ़ाई कर रहा था। शुक्रवार को वह अपने कुछ साथियों के साथ नदी किनारे गया था। इसी दौरान उसका एक साथी अचानक तेज धारा में फंसकर डूबने लगा। दोस्त को मौत से जूझता देख अकरम ने बिना एक पल गंवाए नदी में छलांग लगा दी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अकरम ने साथी को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन नदी का तेज बहाव इतना खतरनाक था कि वह खुद भी उसमें समा गया। काफी तलाश के बाद उसका शव बरामद किया गया। घटना की खबर जैसे ही गांव पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, वहीं पूरे गांव में मातम छा गया

शनिवार शाम जब अकरम का शव पिपरा खुर्द पहुंचा तो माहौल बेहद गमगीन हो गया। शव को देखते ही परिजनों की चीख-पुकार से हर आंख नम हो उठी। शाम करीब पांच बजे मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार गांव के कब्रिस्तान में अकरम को सुपुर्द ए-खाक किया गया। नमाज-ए-जनाजा में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे
गांव के लोगों का कहना है कि अकरम बेहद मिलनसार, नेकदिल और मददगार स्वभाव का युवक था। हर कोई उसकी बहादुरी की चर्चा करते नहीं थक रहा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अकरम की वीरता को देखते हुए उसके परिवार को आर्थिक सहायता और सम्मान दिया जाए
सूचना पर पहुंचे क्षेत्रीय लेखपाल ने घटना की रिपोर्ट तैयार कर तहसील प्रशासन को भेज दी है। पूरे गांव में शोक का माहौल है और लोगों की जुबां पर बस एक ही बात है
अकरम भले ही दुनिया छोड़ गया, लेकिन उसकी बहादुरी हमेशा जिंदा रहेगी।”

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