अदभुद बरगद वृक्ष: दुनिया का सबसे बड़ा बरगद वृक्ष
परिवेश Sep 07, 2020 at 08:52 PM , 594बरगद का वृक्ष तो भारत में कहीं भी आसानी से दिख जाता है .बरगद का वृक्ष एक दीर्घजीवी विशाल वृक्ष है., हिन्दू परंपरा में इसे पूज्य माना जाता है. अलग अलग देवों से अलग अलग वृक्ष उत्पन्न हुए, उस समय यक्षों के राजा मणिभद्र से वटवृक्ष उत्पन्न हुआ. ऐसा मानते हैं इसके पूजन से और इसकी जड़ में जल देने से पुण्य प्राप्ति होती है. यह वृक्ष त्रिमूर्ति का प्रतीक है. इसकी छाल में विष्णु,जड़ में ब्रह्मा और शाखाओं में शिव का वास माना जाता है. जिस प्रकार पीपल को विष्णु जी का प्रतीक माना जाता है, उसी प्रकार बरगद को शिव जी माना जाता है. यह प्रकृति के सृजन का प्रतीक है, इसलिए संतान के इच्छित लोग इसकी विशेष पूजा करते हैं. यह बहुत लम्बे समय तक जीवित रहता है , अतः इसे ष्अक्षयवटष् भी कहा जाता है. लेकिन हम जिस बरगद के वृक्ष की बात करने जा रहे है वह अद्भुत और अनोखा है. इस विशालकाय बरगद को देखने के बाद यह समझ में आता है कि यह कोई बरगद का वृक्ष नही अपितु एक छोटा मोटा जंगल है, जिसमे हजारों वृक्ष उगे हुए हैं. लेकिन अगर आप गौर से देखेंगे तो पता चलेगा यह एक बरगद का वृक्ष है और इसकी जटाएँ, जड़ और तने चारो और फैले हैं. स्वयं लेखक इस अद्भुत वृक्ष को 1980 में देख चुका है. यह दुनिया का विशालकाय बरगद वृक्ष है जिसे देखने के लिए देश विदेश से हजारों पर्यटक इसे देखने आते हैं. बरगद का यह वृक्ष कोलकाता के आचार्य जगदीश चन्द्र बोस बोटैनिकल गार्डन में स्थित है. कहा जाता है वर्ष 1787 में इस वृक्ष को इस बोटैनिकल गार्डन में रोपा गया था. तब इस वृक्ष कि आयु 15 से 20 वर्ष की थी. इस हिसाब से यह अब 250 वर्ष से भी अधिक आयु का है . आज यह एक जंगल की तरह दिखता है. वास्तव में इस वृक्ष की शाखाओं से निकली जटाएं पानी की तलाश में भूमि की ओर बढती हैं जो बाद में जड़ के रूप में वृक्ष को सहारा उअर पानी देने लगती हैं .वनस्पतिशास्त्रियों के अनुसार यह बरगद का वृक्ष दुनिया का सबसे चैड़ा वृक्ष है. यह 19,818 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है. इस बर्गर की 3,372 से अधिक जताएँ जड़ का रूप ले चुकी हैं. इस बरगद में 87 से अधिक अलग अलग प्रजातियों के हजारों पक्षी इस पर निवास करते हैं. वृक्ष की परिधि 486 मीटर है. इसकी सबसे ऊँची शाखा 24 मीटर लम्बी है. 1925 में इस वृक्ष की मुख्य शाखा में फंगस लग गया था जिसके बाद इसे काटना पडा. वर्ष 1984 और 1987 में आये दो चक्रवाती तूफानों ने इस वृक्ष को काफी नुकसान पंहुचाया परन्तु यह आज भी शान से खड़ा है. इसकी विशालता को देखते हुए गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड ने इसे वार्ड रिकार्ड का दर्जा दे चुका है. 1987 में भारत सरकार इस पर डाक टिकट छाप चुकी है. अब यह बोटैनिकल सर्वे आफ इंडिया का प्रतीक चिन्ह है. 13 लोगों की एक विशेष टीम इस बरगद की देखभाल करती है. इसे वाकिंग ट्री भी कहते है. इस गार्डन के केयर टेकर का अनुसार जिधर प्रदूषण अधिक होता है उधर यह वृक्ष नही बढ़ता है. यह पूर्व दिशा कि ओर बढ़ रहा है. प्रातःकाल सूर्य की ओर से आने वाली सूर्य रश्मियों के ओर इसकी वृद्धि देखी गई है।






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