नाग पंचमी : प्रकृति के हर जीव में देवत्व देखने वाली सनातन परंपरा
जनपत की खबर Aug 17, 2026 at 06:20 AM , 68**नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं**
*राकेश पाण्डेय "निश्छल"*
सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषताओं में एक यह है कि उसने मनुष्य को केवल मनुष्य से प्रेम करना नहीं सिखाया, बल्कि **पशु-पक्षियों, वृक्षों, नदियों, पर्वतों और समस्त प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध जोड़ना सिखाया।** यहां गाय पूजनीय है, वटवृक्ष में जीवन का प्रतीक देखा जाता है, बैल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है और कोयल के स्वर तक को व्रत की पूर्णता से जोड़ा जाता है।
इसी विराट प्रकृति-दृष्टि का अद्भुत पर्व है **नाग पंचमी।**
सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल नागों की पूजा का दिन नहीं, बल्कि उस सनातन विचार का उत्सव है जिसमें मनुष्य स्वयं को प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि उसका एक हिस्सा मानता है। जिस जीव से सामान्य मनुष्य भयभीत होता है, उसके भीतर भी देवत्व का दर्शन करना भारतीय संस्कृति की संवेदनशीलता और व्यापक दृष्टि को दर्शाता है।
नाग पंचमी के दिन नाग देवताओं का पूजन कर दूध, धान का लावा आदि अर्पित करने की परंपरा है। भक्त नाग देवताओं से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में राहु-केतु से जुड़े कष्टों के निवारण के लिए भी नाग पंचमी के पूजन को महत्वपूर्ण माना गया है।
### आठ नाग देवताओं का स्मरण
पौराणिक परंपरा में नाग पंचमी के दिन आठ प्रमुख नाग देवताओं—**अनंत, वासुकी, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलिक, कर्कट और शंख**—का स्मरण और पूजन किया जाता है। प्रत्येक नाग का अपना विशिष्ट पौराणिक महत्व है।
**अनंत अर्थात शेषनाग** भगवान विष्णु की शय्या के रूप में विराजमान हैं। सनातन परंपरा में उन्हें अनंत शक्ति और धारण करने वाली शक्ति का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि त्रेतायुग में लक्ष्मण और द्वापर में बलराम उनके अंशावतार थे।
**वासुकी नाग** भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं। समुद्र मंथन में मंदराचल पर्वत के चारों ओर वासुकी को ही रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया था। शिव के कंठ में सुशोभित नाग भी हमें भय पर विजय और विष को धारण कर अमृत बचाने का संदेश देता है।
**पद्म नाग** का उल्लेख प्राचीन पौराणिक परंपराओं में मिलता है। इसी प्रकार **महापद्म** का वर्णन भी विभिन्न पुराणों में नाग कुलों के प्रमुख रूप में मिलता है।
**तक्षक नाग** का विशेष उल्लेख महाभारत में मिलता है। राजा परीक्षित की कथा से तक्षक का नाम भारतीय पौराणिक स्मृति में विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। तक्षशिला से भी तक्षक के नाम का संबंध बताया जाता है।
**कुलिक नाग** को नाग परंपरा में विशिष्ट स्थान प्राप्त है और उनका संबंध ब्रह्मा जी से जोड़ा जाता है।
**कर्कट नाग** का उल्लेख भी पौराणिक कथाओं में मिलता है। नागों से जुड़ी अनेक कथाएं भारतीय धार्मिक साहित्य में प्रकृति, तप, शक्ति और कर्म के गहरे संदेश समेटे हुए हैं।
वहीं **शंख नाग** को नागों के प्रमुख कुलों में गिना गया है और परंपरा में उन्हें बुद्धिमत्ता से जोड़ा जाता है।
### नाग पंचमी का संदेश केवल पूजा तक सीमित नहीं
नाग पंचमी का वास्तविक सौंदर्य केवल पूजा-विधि में नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे **जीवन-दर्शन** में है।
सनातन परंपरा कहती है कि संसार में प्रत्येक जीव का अपना महत्व है। सांप भय का प्रतीक हो सकता है, लेकिन वही प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए नाग की पूजा हमें यह स्मरण कराती है कि **जिसे हम अपने लिए उपयोगी नहीं समझते, उसके अस्तित्व का भी प्रकृति में कोई न कोई उद्देश्य अवश्य है।**
हमारी परंपरा ने कभी प्रकृति को केवल संसाधन नहीं माना। नदी मां है, धरती माता है, पर्वत देव हैं, वृक्ष पूजनीय हैं और पशु-पक्षियों तक के प्रति कृतज्ञता का भाव है।
यही कारण है कि नाग पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि **मनुष्य और प्रकृति के बीच सदियों पुराने रिश्ते का उत्सव** भी है।
आज जब पर्यावरण संकट और जैव विविधता का संरक्षण पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती है, तब नाग पंचमी का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है—**प्रकृति को जीतना नहीं, उसके साथ जीना सीखिए।**
आइए, इस नाग पंचमी पर नाग देवताओं का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। भगवान शिव और नाग देवताओं से अपने परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें और साथ ही संकल्प लें कि प्रकृति के प्रत्येक जीव के प्रति हमारे मन में करुणा, सम्मान और संरक्षण का भाव बना रहेगा।
**जहां हर जीव में ईश्वर का अंश दिखाई दे, जहां वृक्ष में जीवन और नदी में मां का स्वरूप दिखाई दे, जहां नाग में भी देवत्व का दर्शन हो— वही तो सनातन की विराट दृष्टि है।**
**नाग देवताओं को नमन। नाग पंचमी के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। हर-हर महादेव। ॐ नमः शिवाय।**































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