टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के वार्षिक सम्मेलन में देशभर के शिक्षक प्रतिनिधियों ने उठाए मुद्दे

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टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और पुरानी पेंशन बहाली की उठी मांग
 

लखनऊ। अटल बिहारी बाजपेयी कन्वेंशन सेंटर, लखनऊ में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) का वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात और बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से शिक्षक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।
 
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक मुख्य अतिथि तथा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह*श अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष **डा. दिनेश चन्द्र शर्मा** ने की, जबकि संचालन संजय सिंह ने किया।
 
 शिक्षक नई पीढ़ी और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : बृजेश पाठक
 
मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करते, बल्कि नई पीढ़ी के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण के साथ राष्ट्र निर्माण की आधारशिला भी तैयार करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की भूमिका सदैव सर्वोपरि रही है।
 
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा और शिक्षकों के हित में अनेक कार्य किए हैं। फेडरेशन की ओर से रखी गई मांगों को उचित फोरम पर उठाकर उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा।
 
 शिक्षकों की मांगों के समाधान के लिए मंत्रालय से कराएंगे वार्ता : नीरज सिंह
 
अति विशिष्ट अतिथि नीरज सिंह ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं और किसी भी राष्ट्र के भविष्य का सृजन करते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि फेडरेशन की मांगों के समाधान के लिए शीघ्र ही प्रतिनिधिमंडल की मानव संसाधन विकास मंत्रालय से वार्ता कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वे सदैव शिक्षकों के साथ खड़े हैं।
 
 समन्वय से समाधान नहीं तो संघर्ष का रास्ता : डा. दिनेश शर्मा
 
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि देशभर के शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने, पुरानी पेंशन बहाल करने सहित अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए फेडरेशन फिलहाल समन्वय का मार्ग अपना रहा है।
 
उन्होंने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकारों से समन्वय स्थापित कर शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण का प्रयास किया जा रहा है। **यदि समन्वय से समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो फेडरेशन संघर्ष का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा।**
 
राष्ट्रीय महासचिव राम मूर्ति ठाकुर ने देशभर से आए शिक्षक प्रतिनिधियों का आभार जताया। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2027 का राष्ट्रीय अधिवेशन झारखंड में आयोजित किया जाएगा।
 
### 11 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा
 
सम्मेलन के दौरान दोनों अतिथियों को फेडरेशन की ओर से **11 सूत्रीय मांग-पत्र** सौंपा गया। इसमें प्रमुख रूप से आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए कानून बनाने, पीएफआरडीए/एनपीएस/यूपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना बहाल करने तथा देशभर के शिक्षकों को केंद्रीय विद्यालय के शिक्षकों के समान वेतनमान देने की मांग की गई।
 
फेडरेशन ने आठवें वेतन आयोग में शिक्षकों को भी केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर संशोधित सुनिश्चित कैरियर योजना के अनुरूप वेतन लाभ देने, प्रत्येक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद स्वीकृत कर उनकी तैनाती करने तथा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की मांग रखी।
 
मांग-पत्र में केंद्रीय विद्यालयों के शिक्षकों के अनुरूप राज्यों के शिक्षकों को अवकाश सुविधा देने, प्रत्येक शिक्षक को न्यूनतम 20 लाख रुपये का निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा और दो करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस देने की मांग भी शामिल है।
 
इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 171(3)(ग) में संशोधन कर प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापन कर रहे शिक्षकों को विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का अधिकार देने, बाल्य देखभाल अवकाश में संतानों की संख्या संबंधी प्रतिबंध हटाने तथा देशभर में विद्यालयों के संविलियन पर रोक लगाने की मांग की गई।
 
फेडरेशन ने अब तक मर्ज किए जा चुके विद्यालयों को पुनः संचालित करने तथा सेवाकाल में मृत शिक्षकों के ऐसे आश्रितों, जो निर्धारित BTC/D.El.Ed., प्राथमिक स्तर की टीईटी अथवा B.Ed. एवं उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी की योग्यता रखते हों, को क्रमशः प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त करने की मांग भी उठाई।
 
सम्मेलन में संजय सिंह, शिवशंकर पाण्डेय, राधेरमण त्रिपाठी, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, सुधांशु मोहन, वंदना सक्सेना, गौहर अहमद भट, विपिन प्रकाश शर्मा, ध्रुवपद घोषाल, कृष्णानंद राय, बृजेश पाण्डेय, राहुल गवहाणे, प्रदीप पाटिल, वेद प्रकाश मिश्रा, अजय सिंह, त्रिवेन्द्र कुमार, आशुतोष त्रिपाठी, अक्षत पाण्डेय, संजीव शर्मा और प्रियांशु गौड़ सहित अनेक शिक्षक प्रतिनिधियों का विशेष सहयोग रहा।

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