अदभुत मंदिर: सोने का मंदिर

परिवेश , 615

भारत में ऐसे कईअदभुत मंदिर हैं, जो किसी न किसी वजह से विशेष माने जाते हैं. इनकी अपनी किसी विशेषता के कारण ही ख्याति है. ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु के वेल्लूर से सात किलोमीटर दूर थिरूमलाई कोडी में है, जिसे श्री लक्ष्मी नारायणी मंदिर के नाम से जाना जाता है.  इसे दक्षिण भारत का 'स्वर्ण मंदिर' या 'गोल्डन टेंपल' कहा जाता हैं. जिस तरह अमृतसर का स्वर्ण मंदिर पूरे भारत के साथ-साथ विश्व प्रसिद्ध भी है, ठीक उसी तरह यह मंदिर भी है.  यह मंदिर रेलवे स्टेशन काटपाडी से बस 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.  साल-भर यह मंदिर भक्तों से भरा रहता है.

मंदिर की रचना वृताकार है और बहूत ही भव्य है. यह 100 एकड़ से ज़्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है और इसके चारों तरफ से हरियाली ही हरियाली है. 15 हज़ार किलोग्राम शुद्ध सोने से बना यह मंदिर रात के वक्त रोशनी में और भी खूबसूरत और अदभुत दिखता है .मंदिर परिसर के बाहर की तरफ एक सरोवर बनाया गया है जिसमें भारत की सभी मुख्य नदियों का पानी लाया गया है. इस मंदिर को सुबह 4 से 8 बजे तक अभिषेक के लिए और सुबह 8 से रात के 8 बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाता है. इस मंदिर को और खूबसूरत बनाने के लिए इसके बाहरी क्षेत्र को सितारे का आकार दिया गया है. इस मंदिर को 400 सुनारों और कारीगरों ने सात साल की मेहनत से तैयार किया है.

 इसके निर्माण में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत आई थी. कहते हैं कि इस मंदिर के निर्माण में जितना सोना लगा है, उतना दुनिया के किसी मंदिर में नहीं लगा है.

मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं पर सोने के फॉइल की 12 परतें चढ़ी हुई हैं. ऐसा कहा जाता है कि यह विश्व का एकलौता ऐसा मंदिर है जिसमें इतने सोने का प्रयोग हुआ है. अमृतसर के गोल्डन टेम्पल में भी सिर्फ 750 किलो की सोने की छतरी लगी हुई है. इस महालक्ष्मी मंदिर में हर एक कलाकृति हाथों से बनाई गई है. इस मंदिर को भक्तों के लिए 2007 में खोला गया था. रात के समय यहां भक्तों की संख्या ज़्यादा रहती है, क्योंकि इस वक्त सोने से बने पूरे मंदिर को रोशनी से जगमगा जाता है, जो एक अदभुत  नज़ारा होता है. यह सारी रात चमकता रहता है, लेकिन खासकर रात के समय जब मंदिर में प्रकाश किया जाता है तो इसमें लगे सोने की चमक देखते ही बनती है.
मंदिर परिसर में करीब 27 फीट ऊंची एक दीपमाला भी है, जिसे जलाने पर सोने से बना यह मंदिर एकदम जगमगा उठता है. मंदिर के निर्माण में लगे सोने की वजह से ही इसकी सुरक्षा में 24 घंटे पुलिस के जवान और गार्ड तैनात रहते हैं.
 मंदिर में जाने के लिए बहुत पाबंदियों और नियमों  का पालन करना पड़ता  है जैसे आप लुंगी, शॉर्ट्स, नाइटी, मिडी, बरमूडा पहनकर इस मंदिर में नहीं जा सकते.

दक्षिण भारत के  इस स्वर्ण मंदिर का निर्माण वेल्लोर स्थित धर्मार्थ ट्रस्ट श्री नारायणी पीडम द्वारा कराया गया है, जिसके प्रमुख आध्यात्मिक नेता श्री सक्ति अम्मा को 'नारायणी अम्मा' के नाम से भी जाना जाता है. मंदिर के पास ही श्री नारायणी अस्पताल और अनुसंधान केंद्र भी है, जिसे 'श्री नारायणी पीडम' चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा ही चलाया जाता है.

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