अद्भुत मशरूम : डेढ़ लाख रूपये किलो मशरूम
परिवेश May 22, 2021 at 07:00 PM , 497मशरूम हमारी सेहत के लिए बहुत गुणकारी है. मशरूम कई तरह के होते हैं, जिनमें से कुछ खाने लायक होते हैं और कुछ नहीं. कुछ ऐसे भी मशरूम होते हैं जो जहरीले होते हैं. इन्हेंह खाने से आपकी तबियत खराब हो सकती है. मशरूम में प्रोटीन, विटामिन D,फाइबर, अमीनो एसिड, जर्मेनियम, सेलेनियम और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. यही नहीं यह नैचुरल एंटी ऑक्सींडेंट होने के साथ ही एंटीवायरल गुणों से भरपूर है. चीन में तो इस औषधि का दर्जा दिया गया है. वहीं रोम के लोग मशरूम को भगवान का भोजन मानते हैं.
लेकिन आज हम जिस मशरूम की बात करने ज रहे है वह बहुत ही गुणकारी और काफी मंहगा है .
गुजरात के वैज्ञानिकों ने इस मशरूम उगाकर इतिहास रचा है. इस मशरूम की कीमत डेढ़ लाख रुपये प्रति किलो बताई जा रही है. यह मशरूम खाने के अलावा कैंसर की दवाओं में भी विशेष रूप से उपयोगी है.
अब तक आपने बाजार से मशरूम यूं ही कोई 400 या 500 रुपये किलो तक खरीदा होगा. इसका स्वाद आपके जायके को जानदार बना देता है, लेकिन आज हम आपको ऐसे मशरूम की कहानी बयां करने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर या सुनकर आप भी चौंक जाएंगे. देखने में यह मशरूम भले ही आपको सामान्य लग रहा हो, लेकिन यह दुनिया का सबसे महंगा मशरूम है. सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि दवाओं में भी इसका काफी महत्व है. खासकर कैंसर की दवाओं में इस मशरूम का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.
कच्छ स्थित गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ डेजर्ट इकोलॉजी के वैज्ञानिकों ने विशेष मशरूम कोर्डिसेप्स मिलिटरिस की खेती कर नई कामयाबी हासिल की है. इस विशेष मशरूम की कीमत डेढ़ लाख रुपये प्रति किलो है. संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक निश्चित तापमान में 35 जार में मशरूम को 90 दिनों के भीतर तैयार किया है.
दरअसल, विशेष मशरूम कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस का इस्तेमाल दवाओं में भी किया जाता है. स्तन कैंसर के लिए बनने वाली दवाओं में इस मशरूम का इस्तेमाल होता है. चीन और तिब्बत हर्बल दवाओं में इसका ज्यादा उपयोग करते हैं. संस्थान के निदेशक के अनुसार कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस नामक मशरूम को हिमालयी सोना कहा जाता है. इसमें स्वास्थ्य के कई फायदे हैं और शायद जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारी को रोकने की अद्भुत क्षमता है. संस्थान ने इस मशरूम के एंटीट्यूमर पहलू का अध्ययन किया है. शुरुआती जांच से पता चला है कि इस मशरूम का अर्क गजब के नतीजे दे सकता है.
संस्थान के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार लोगों पर मेडिकल ट्रायल करने के लिए नियामक मंजूरी मांगी गई है. उम्मीद है कि जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी. उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर पर इसके प्रभाव के बारे में शोध किए जा रहे हैं, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से फिलहाल इसे रोका गया है. गाइड संस्थान ने सफलतापूर्वक विशेष प्रजाति के मशरूम उगाने के बाद कारोबारियों को प्रशिक्षण देने का फैसला किया है. संस्थान का मानना है कि प्रशिक्षण देने के बाद लोग बड़े पैमान पर इसके जरिए रोजगार अर्जित सकते हैं. हालांकि लैब सतह पर मशरूम की खेती के प्रशिक्षण की कीमत काफी महंगी है. एक सप्ताह के प्रशिक्षण के लिए एक लाख रुपये देने होंगे, लेकिन संस्थान सामान्य शुल्क पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है.
मशरूम आपकी सेहत के लिए बहुत गुणकारी है. मशरूम कई तरह के होते हैं, जिनमें से कुछ खाने लायक होते हैं और कुछ नहीं. ऐसे मशरूम हैं जिन्हें् आप खा सकते हैं. वहीं सभी मशरूम ऐसे नहीं होते जिन्हें आप खा सकें. कुछ ऐसे भी मशरूम होते हैं जो जहरीले होते हैं. इन्हेंं खाने से आपकी तबियत खराब हो सकती है.
मशरूम में प्रोटीन, विटामिन D,फाइबर, अमीनो एसिड, जर्मेनियम, सेलेनियम और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. यही नहीं यह नैचुरल एंटी ऑक्सींडेंट होने के साथ ही एंटीवायरल गुणों से भरपूर है. चीन में तो इसेऔषधि का दर्जा दिया गया है. वहीं रोम के लोग मशरूम को भगवान का खाना मानते हैं.






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