निपुण आकलन में बड़ी गड़बड़ी! सरोजनीनगर ब्लॉक के साथ नगर क्षेत्र जोन-1 के स्कूलों पर भी उठे सवाल, 100% से अधिक रिजल्ट और ‘निपुण’ के बाद फेल घोषित छात्रों से मचा हड़कंप
जनपत की खबर Mar 19, 2026 at 06:30 PM , 128लखनऊ। लखनऊ में घोषित निपुण आकलन परिणामों को लेकर अब विवाद और गहराता जा रहा है। सरोजनीनगर विकास खण्ड के साथ-साथ नगर क्षेत्र जोन-1 के विद्यालयों में भी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी और निराशा का माहौल है।
सरोजनीनगर ब्लॉक में जहां कुछ विद्यालयों के परिणाम 100 प्रतिशत से भी अधिक दिखाए गए हैं, वहीं नगर क्षेत्र जोन-1 के कई स्कूलों में एक नई और गंभीर समस्या सामने आई है। यहां कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पहले छात्रों को ‘निपुण’ घोषित किया गया, लेकिन बाद में उन्हीं छात्रों को फेल दिखा दिया गया। इस विरोधाभास ने पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
सरोजनीनगर ब्लॉक के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्राथमिक विद्यालय गोदौली में 113 प्रतिशत और प्राथमिक विद्यालय ऐन में 104 प्रतिशत छात्र निपुण दिखाए गए हैं, जो स्पष्ट रूप से तकनीकी या डाटा एंट्री की बड़ी त्रुटि का संकेत देते हैं।
इसके अलावा, कई ऐसे विद्यालय भी हैं जो पिछले वर्षों में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे, लेकिन इस बार उनके परिणाम अप्रत्याशित रूप से खराब आए हैं। कक्षा-1 के परिणामों में प्राथमिक विद्यालय महमूदपुर और शाहीन का पुरवा में कुछ विद्यालयों में कक्षा-1 के छात्र निपुण घोषित किए गए हैं, जबकि उसी विद्यालय की कक्षा-2 में सभी छात्र असफल दिखाए गए हैं। यह विरोधाभास परिणामों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
नगर क्षेत्र जोन-1 के विद्यालयों में सामने आई नई विसंगति—‘निपुण’ घोषित छात्रों को बाद में फेल दिखाना पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। इससे न केवल छात्रों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, बल्कि शिक्षकों के कार्य पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि इस प्रकार की त्रुटियां बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, और तकनीकी खामियों को दूर किया जाए और सही एवं पारदर्शी परिणाम पुनः जारी किए जाएं। ऐसा स्थिति ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
ऐसी स्थिति में शिक्षकों ने भी संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और त्रुटिपूर्ण आंकड़ों को सुधारते हुए सही परिणाम जारी किए जाएं, ताकि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बना रहे।































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