कामर्शियल वाहनों का एकमुश्त टैक्स जमा करना स्वामियों के लिए चुनौती

जनपत की खबर , 109

ए के दुबे 
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कामर्शियल वाहनों का वन टाइम (एकमुश्त) टैक्स जमा करवाने की पालिसी के खिलाफ वाहन स्वामियों में रोष व्याप्त है आरटीओ कार्यालय ट्रांसपोर्ट नगर लखनऊ में आज परिवहन विभाग द्वारा आयोजित परिवहन मेला में वाहन स्वामी अधिकारी एवं कर्मचारियों के सामने गिड़गिड़ाते नजर आए। 
वाहन स्वामियों का कहना है कि एक साथ हम अपने वाहनों का लाखों रुपए टैक्स का भुगतान कैसे करें। हमने वाहनों को बैंक से फाइनेंस कराकर चलाने के लिए निकाला है जिसकी प्रतिमाह किस्त 10हजार से लेकर लाखों रुपए बैंक को जमा करना पड़ता है साथ ही वाहन चलाने के लिए अन्य भी खर्चा करना पड़ता है। ऐसे में हम अचानक एक मुश्त टैक्स कहां से लाकर जमा करें। एक वाहन स्वामी तो इतना परेशान था कि उसके पास 9 गाड़ियां है जिसका टैक्स लगभग 14 लाख रुपए बताया जो जमा करना पड़ेगा, इतना सुनते ही उसके होश उड़ गया और वह वहीं पर हंगामा करने लगा और सरकार के खिलाफ और प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त करते हुए सरकार से गुहार लगाई की इस नियम कानून में संशोधन करते हुए हम वाहन स्वामियों को जीने का अधिकार दिया जाए। यदि एक मुश्त टैक्स जमा करना पड़ेगा तो आत्महत्या करना पड़ेगा। यहां काउंटर पर मौजूद आरटीओ कार्यालय के कर्मचारी कृष्ण कुमार दुबे ने वाहन स्वामी को समझा बुझाकर शांत कराया। 
वहीं सरकार द्वारा कमर्शियल वाहनों पर एकमुश्त टैक्स जमा कराने की नई नीति के विरोध में प्रदेशभर के वाहन स्वामियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। ट्रक, बस, मैक्सी कैब और अन्य व्यावसायिक वाहन संचालकों का कहना है कि एक साथ लाखों रुपये का टैक्स जमा करना उनके लिए संभव नहीं है।
वाहन मालिकों का तर्क है कि पहले जहां टैक्स किस्तो या निर्धारित अवधि के अनुसार जमा किया जाता था, वहीं अब एकमुश्त भुगतान की बाध्यता से छोटे और मध्यम स्तर के संचालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। कई संचालकों ने बताया कि डीजल की बढ़ती कीमतें, मेंटेनें खर्च और बीमा प्रीमियम पहले ही भारी पड़ रहे हैं, ऐसे में एकमुश्त टैक्स की व्यवस्था ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और वाराणस समेत कई जिलों में वाहन स्वामियों ने बैठकें कर इस नीति पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकार किस्तों में भुगतान या आंशिक राहत की व्यवस्था करे तो राहत मिल सकती है।
कुछ वाहन मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वे संगठित रूप से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि यह नीति परिवहन व्यवसाय को प्रभावित कर सकती है और अंततः इसका असर आम जनता पर भी पड़ेगा।
सरकार की ओर से अभी तक इस विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन परिवहन विभाग के सूत्रों का कहना है कि राजस्व संग्रह को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
अब देखना होगा कि सरकार वाहन स्वामियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस नीति में किसी प्रकार की संशोधन या राहत की घोषणा की जाती है।

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