घर के छोटे तालाबों से संयुक्त राष्ट्र तक पहुंची पहचान: यूपी की दलित बहनों ने सजावटी मछलियों से रची नई सफलता कहानी

जनपत की खबर , 350

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश की दलित महिलाओं ने अपने घरों के छोटे तालाबों और आंगनों से एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिसने उन्हें न केवल आत्मनिर्भर बनाया बल्कि वैश्विक पहचान भी दिलाई। मिशन नौशक्ति, जो आईसीएआर-नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज (एनबीएफजीआर) की अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के तहत चलाया जा रहा है, को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने वैश्विक स्तर पर सम्मानित किया है।

एफएओ का वैश्विक सम्मान

विश्व खाद्य मंच 2025 का मुख्य आयोजन 10 से 17 अक्टूबर तक रोम में एफएओ मुख्यालय और ऑनलाइन हुआ। यह सम्मान विश्व खाद्य मंच 2025 में रोम स्थित एफएओ मुख्यालय में आयोजित समारोह में दिया गया। एफएओ के 80 वर्ष पूरे होने पर आयोजित इस कार्यक्रम की थीम थी— “हाथ मिलाकर बेहतर भोजन और भविष्य”।
एनबीएफजीआर को यह पुरस्कार सतत जल-आधारित खाद्य प्रणालियों में उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला।

दलित बहनों के जीवन में क्रांति

मिशन नौशक्ति के तहत अब तक 425 से अधिक दलित बहनों को सजावटी मछलियों के पालन, देखभाल और एक्वेरियम निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे वे न सिर्फ आत्मनिर्भर बनीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान भी आई।
हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित इस पहल की रूपरेखा डॉ. पूनम जयंत सिंह ने तैयार की। उनके साथ डॉ. टी.टी. अजीत, डॉ. ए.के. पाठक, डॉ. एल.के. त्यागी, श्री रवि, श्री ए.के. बिष्ट, श्री संजय कुमार, श्री विकास, डॉ. अर्पिता बत्ता, और श्री अमरजीत सिंह की टीम शामिल रही।

सहयोग और साझेदारी

इस मुहिम में हाईटेक फिशरीज, एक्वावर्ल्ड, सफाई कर्मचारी आंदोलन, और कई केवीके केंद्रों (सीतापुर, उन्नाव, कानपुर देहात) ने भी सक्रिय सहयोग दिया।
एफएओ महानिदेशक डॉ. क्व डोंगयू ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “यह परियोजना महिलाओं में आत्मनिर्भरता और तकनीकी नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण है।”

आंगन बने उत्पादन केंद्र

दलित बहनों ने अपने घरों के खाली आंगनों और नालियों को छोटे सीमेंट तालाबों में बदल दिया। इन्हीं में रंग-बिरंगी सजावटी मछलियां तैरने लगीं — आशा और कमाई का प्रतीक बनकर।
महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ एक पूरा एक्वेरियम किट दिया गया — जिसमें फिल्टर, पंप, लाइट, कवर, पौधे, फीड और मछलियां शामिल थीं।

गांव से बाजार तक

अब ये महिलाएं घरों में एक्वेरियम बनाकर और मछलियां पालकर उन्हें एनबीएफजीआर व एक्वावर्ल्ड के माध्यम से बेचती हैं।
इससे उन्हें नियमित आय, वित्तीय आजादी, और स्वावलंबन मिला है।

सफलता की कहानियां

उन्नाव की पूनम और संगीता जैसी बहनें अब ट्रेनी से बिजनेसवुमन बन चुकी हैं। उन्होंने जनवरी 2025 में प्रशिक्षण के बाद मिनी एक्वेरियम की बिक्री शुरू की और एससीएसपी फंड से दो दुकानें खोलीं।

हब मॉडल से मजबूत हुई ग्रामीण उद्यमिता

एनएबीआईसी (नौशक्ति एक्वागिरी बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर) के तहत बने कलेक्शन और सेल हब ने ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा दी है।
बाराबंकी के हाईटेक सेंटर में यह मॉडल विशेष रूप से सफल रहा, जिससे धनकुट्टी गांव के दलित परिवारों की आर्थिक स्थिति बदली।

बदलाव जो सिर्फ आर्थिक नहीं

यह पहल केवल कमाई का जरिया नहीं रही, बल्कि आत्मविश्वास, सामाजिक सम्मान और जीवन दृष्टि में भी गहरा बदलाव लाई है।
जो महिलाएं कभी घर से बाहर नहीं निकलती थीं, वे अब नेतृत्व की भूमिका में हैं और दूसरों को प्रेरित कर रही हैं।

वैश्विक मंच पर भारतीय दलित बहनों की गूंज

एफएओ द्वारा दिया गया GO08 ग्लोबल टेक्निकल अवॉर्ड दलित बहनों की मेहनत, कौशल और हिम्मत की जीत है।
एनबीएफजीआर, केवीके और ग्रामीण महिलाओं का यह मॉडल दिखाता है कि जब स्थानीय बुद्धि, तकनीक और सामूहिक सोच मिलती है, तो बदलाव अवश्य आता है।

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