आज़ाद हिंद फौज का एक सिपाही, जो हिंदी सिनेमा का बहुत नामी अदाकार भी बना।

जनपत की खबर , 293

आज़ाद हिंद फौज का एक सिपाही, जो हिंदी सिनेमा का बहुत नामी अदाकार भी बना। सिनेमा का एक ऐसा चेहरा जिससे भारतीय सिने प्रेमी खूब वाकिफ़ हैं। नज़ीर हुसैन। जो सिर्फ़ एक कलाकार नहीं थे। बहुत उम्दा लेखक भी थे। एक और जो बेहद खास बात नज़ीर हुसैन साहब के व्यक्तित्व से जुड़ी है वो ये कि, इन्हें भोजपुरी सिनेमा का पितामह भी कहा जाता है। क्योंकि दुनिया की पहली भोजपुरी फ़िल्म "गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो" के निर्माण में नज़ीर हुसैन साहब का बहुत बड़ा योगदान था। ये फ़िल्म नज़ीर साहब ने ही लिखी थी। व कई अन्य भोजपुरी फ़िल्मों का निर्माण व लेखन इन्होंने किया था। 

अपने करियर में इन्होंने 500 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया था। और तरह-तरह के किरदार इन्होंने निभाए थे। आज नज़ीर साहब की पुण्यतिथि है। 16 अक्टूबर 1987 को नज़ीर हुसैन जी ये दुनिया छोड़कर गए थे। इनके पिता रेलवे में नौकरी करते थे। पिता ने इन्हें भी रेलवे में फायर मैन की नौकरी दिला दी। मगर जब दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हुआ तो नज़ीर हुसैन ब्रिटिश इंडियन आर्मी में चले गए। मगर भारतीयों के प्रति अंग्रेजों के बर्ताव से ये भी चिढ़ते थे। इसलिए जब नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फौज का गठन किया तो नज़ीर हुसैन भी उनके साथ हो लिए। इन्हें भी अंग्रेजों को भारत से भगाना था।

दूसरा विश्वयुद्ध जब खत्म हुआ तो अंग्रेजों ने आज़ाद हिंद फौज के कई सिपाहियों को गिरफ़्तार कर लिया। नज़ीर हुसैन भी पकड़े गए। कहते हैं कि अंग्रजों ने कुछ पकड़े गए आज़ाद हिंद फौज के सिपाहियों को सख्त सज़ा देना शुरू कर दिया। कुछ को फांसी की सज़ा भी दी गई। नज़ीर हुसैन को भी फांसी की सज़ा सुनाई गई थी। मगर इन्हें फांसी होती, उससे पहले ही 15 अगस्त 1947 को भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिल गई। आज़ाद हिंद फौज के गिरफ़्तार सिपाहियों को रिहा कर दिया गया। रिहा होने के बाद नज़ीर हुसैन जी ने कला के क्षेत्र में पहचान बनाने के प्रयास शुरू कर दिए। ये एक नाटक कंपनी से जुड़ गए। और आखिरकार कलकत्ता पहुंच गए। कलकत्ता में बिमल रॉय से इनकी जान-पहचान हुई। और ये बिमल दा के सहायक बन गए। 

बिमल दा ने नज़ीर हुसैन से एक फ़िल्म लिखाई। और जो फ़िल्म नज़ीर हुसैन ने लिखी, वो थी 1950 में आई पहला आदमी। ये फ़िल्म नज़ीर हुसैन जी ने आज़ाद हिंद फौज के अपने अनुभवों पर लिखी थी। और बिमल दा ने नज़ीर साहब से इस फ़िल्म में एक्टिंग भी कराई। इस फ़िल्म में नज़ीर हुसैन साहब ने डॉक्टर विजय कुमार नामक एक छोटा सा किरदार निभाया था। इसी फ़िल्म के बाद नज़ीर हुसैन जी ने फ़िल्मों में लगातार अभिनय करना शुरू कर दिया। और फिर अभिनय जगत में उन्होंने खूब शोहरत हासिल की। अपने समय के हर स्टार के साथ नज़ीर हुसैन जी ने काम किया था। किस्सा टीवी शानदार अदाकार नज़ीर हुसैन साहब को ससम्मान याद करते हुए उन्हें नमन करता है। शत शत नमन

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