MIB ने माना, विज्ञापनदाताओं को विज्ञापन से पहले स्व-घोषणा प्रमाण पत्र देना जरूरी
राष्ट्रीय Jun 12, 2024 at 03:30 PM , 119सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने मंगलवार को इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में दिए गए उस आदेश पर चर्चा की गई, जिसमें विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन एजेंसियों को टीवी, प्रिंट, डिजिटल और रेडियो पर विज्ञापन प्रकाशित करने से पहले स्व-घोषणा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत (self-declaration certificate) करने का निर्देश दिया गया है। यह बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई।
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि शासनादेश में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और स्व-घोषणा प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा। ऐसा कहा जा रहा है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठक में इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स से कहा कि मंत्रालय यथासंभव सहयोग करेगा, लेकिन शासनादेश में कोई बदलाव नहीं होगा।
बैठक में शामिल हुए इंडस्ट्री के कुछ लीडर्स ने बताया कि मंत्रालय के अधिकारियों ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया स्वीकार करने या शासनादेश के क्रियान्वयन की तिथि को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, जो 18 जून है।
इस बीच, इंडस्ट्री लीडर्स ने सरकार के रुख पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि नीति निर्माताओं को आदेश लागू करने से पहले हितधारकों से परामर्श करना चाहिए था।हालांकि यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, लेकिन इंडस्ट्री इस योजना की व्यवहार्यता के बारे में फीडबैक दे सकता था।
इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों का मानना है कि आदेश के क्रियान्वयन के मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से काफी चूक हुई है।
एक सूत्र ने कहा, "यह एक असंभव कार्य प्रतीत होता है, क्योंकि देश में 8,000 से अधिक एजेंसियां हैं, जो 6,00,000 से अधिक ब्रैंड्स को संभालती हैं।"
सूत्र ने बताया, "कुछ बड़े विज्ञापनदाताओं के बैनर तले कई ब्रैंड्स हैं। यदि हर विज्ञापन के लिए स्व-घोषणा प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी, तो यह थकाऊ हो जाएगा और इससे विज्ञापनदाता विज्ञापन देने से कतराने लगेंगे।"
एक समाचार पत्र के अधिकारी ने बताया, "भारत के विज्ञापन उद्योग के पैमाने को देखते हुए यह एक बड़ी समस्या होने वाली है। बहुत सी छोटी-छोटी एजेंसियां और विज्ञापनदाता हैं, जो इंटरनेट पर भी नहीं हैं, उनका क्या? या तो हम व्यवसाय खो देंगे या फिर राजस्व खो देंगे।"
एक अन्य स्टेकहोल्डर्स ने कहा, "इसका क्रियान्वयन न केवल बोझिल प्रक्रिया है, बल्कि अक्षम भी है।"
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, 'यदि कोई व्यक्ति लापता हो जाता है और उसके परिवार को रात 2:00 बजे विज्ञापन प्रकाशित करना पड़ा, तो उन्हें प्रमाण पत्र प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा।"
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 मई को जारी निर्देशों के अनुसार, 18 जून से शुरू होने वाले सभी नए विज्ञापनों के लिए स्व-घोषणा प्रमाण पत्र देना होगा।
हितधारकों को स्व-प्रमाणन की प्रक्रिया को समझने के लिए के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। वर्तमान में चल रहे विज्ञापनों को स्व-प्रमाणन की आवश्यकता नहीं है।
घोषणा प्रमाण पत्र में विज्ञापनदाताओं को यह प्रमाणित करना जरूरी है कि विचाराधीन विज्ञापन में कोई भ्रामक दावा नहीं किया गया है और सभी लागू विनियामक आवश्यकताओं का पालन किया गया है। डिजिटल विज्ञापनों के लिए घोषणा MIB वेबसाइट पर डालनी होगी और प्रिंट विज्ञापनों के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर भी ऐसा ही करना होगा।





























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