क्या शिकायतकर्ता की दौड़ बंद होने के इंतजार में है सहकारिता विभाग समिति की जमीन पर कौन कर रहा है खेती?

लखीमपुर खीरी , 216

(हरिशंकर मिश्र/सत्यदेव)

लखीमपुर खीरी। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही भूमाफियाओं पर शिकंजा कसने का दावा कर रहे हो परंतु जिले का सहकारिता विभाग उनके इस दावे को पूर्णतया झुठलाने पर तुला हुआ है। मामला सदर तहसील के ब्लॉक फूलबेहड़ स्थित चभाल कृषि सहकारी समिति बसैगापुर की 258 एकड़ जमीन पर काबिज भूमाफिआयों को लेकर चर्चा में काफी समय से बना हुआ है। इस समिति के पूर्व सचिव सरदूल सिंह के कई वर्षों के प्रयासों के बाद गत वर्ष 4 अप्रैल 2025 को गेहूं की फसल को भूमाफियों द्वारा काटने व उस जमीन पर जाने से रोक लगाई थी किसी आदेश को निरस्त करने के लिए भू माफिया चंद्रप्रकाश व अन्य मा0 उच्च न्यायालय तक गए लेकिन उच्च न्यायालय ने ओ माफियाओं की रिट को खारिज कर दिया अर्थात प्रशासन द्वारा लगाई गई रोक को वैध माना। मामले में फैली जन चर्चाओं के अनुसार लोगों का मानना है कि  इसके बाद भू माफियाआें ने  सहकारिता विभाग के अफसरों से सांठ गांठ करके गेहूं काट लिया और कुछ दिन तक सहकारी समिति की यह जमीन  खाली पड़ी रही फिर भू माफियाओं ने सहकारिता विभाग के अफसर से सांठ गांठ करके धान लगाकर उसकी फसल भी काट ली और पुनः उसमें गेहूं की फसल बोकर सिद्ध कर दिया कि भू माफिया बाहुबली होते हैं जिनके सामने किसी प्रकार का सारा बल बौना होता है। भूमाफियाओं का कहना है कि वह रोक के बाद जमीन के पास नहीं गए हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठता है की जमीन आखिर कौन जोत बो रहा है? मामले में सहकारिता विभाग के जिला सहायक निबंधक रजनीश प्रताप सिंह से जानकारी लेने पर अपने सुर बदलते हुए कहने लगे हैं कि एसडीएम सदर भी इस प्रकरण की जांच कर रहे हैं जांच रिपोर्ट आने के बाद अपनी विभागीय रिपोर्ट व एसडीएम की रिपोर्ट टैली करने के बाद निर्णय लेंगे। जैसा कि उनके कथन से ही स्पष्ट है की वह माफियाओं की एक तरह से मदद ही कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मामले के शिकायतकर्ता सरदूल सिंह जो 80 साल के हो रहे हैं आखिर कब तक जिएंगे और चक्कर लगा पाएंगे। 
दूसरी तरफ मामले में उभर रहे अन्य माफियाओं जिनके द्वारा एक अन्य समिति फर्जी तरीके से बनाकर बैंक खाता चालू कराने में भी अभी तक विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है जिससे उनके भी हौसलों में भी कोई कमी नहीं आई।
बताया जाता है की समिति की इस विवादित जमीन पर एक विद्यालय भी भूमाफियाओं द्वारा चलाए जा रहा है जिसकी मान्यता बेसिक शिक्षा विभाग ने लगभग 8 साल पूर्व दी थी।

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