नवयुग विद्यालय में छात्र परेशान अच्छी शिक्षा के नाम पर हो रहा शोषण

लखीमपुर खीरी , 234

हरिशंकर मिश्र

लखीमपुर खीरी। कुकुरमुत्तों की तरीके से कक्षा 1 से सरकार से मान्यता लेकर इंटर तक स्कूल चलाए जा रहे हैं।  मान्यता की आड़ में भोले भाले छात्रों का जमकर शोषण किया जा रहा है। बताते हैं कि मान्यता प्राप्त करने के लिए जिन अध्यापकों की मार्कशीट लगाई गई है, वह विद्यालय कभी आते ही नहीं हैं अर्थात् जिन लोगों की अंक तालिकाएं मान्यता में लगाई गई हैं वह लोग विद्यालय में नहीं पढ़ाते हैं।
मिली जानकारी के अनुसार ब्लॉक फूलबेहड़ के पड़रिया कलां में नवयुग पब्लिक इंटर कॉलेज की बिल्डिंग तो है कनेक्शन भी है लेकिन बिजली न रहने के कारण छात्रों को इस उमस भरी गर्मी में बाहर पढ़ाया जाता है इस विद्यालय का आलम बड़ा निराला है।
 इस संवाददाता ने जब इस स्कूल की हकीकत जाननी चाही और वहां के मास्टर से बेटे का नाम कक्षा एक में लिखाने की बात की तो उन्होंने बताया कि इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई के लिए 1 साल का फीस 12000 रुपए पड़ती है हिंदी मीडियम के कक्षा एक के फीस 9500 वार्षिक पड़ती है तथा उर्दू की शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों के लिए यह सुविधा दी गई है कि छात्र हिंदू हो या मुसलमान इन छात्रों को अपनी मर्जी से जितनी फीस देना चाहे वह दे सकते हैं जब यह पूछा गया कि संस्कृत पढ़ने के लिए आपके विद्यालय में क्या व्यवस्था है तो उन्होंने बताया कि संस्कृत पढ़ने के लिए शिक्षक नहीं मिल रहे हैं जब शिक्षक मिलेंगे तब हम संस्कृत भी पढ़ाएंगे। सूत्रों से मेरी जानकारी के अनुसार इस विद्यालय में जिन डिग्री धारी लोगों की मार्कशीट मान्यता में लगाई गई हैं वह लोग इस विद्यालय में नहीं पढ़ाते हैं वह अन्य कहीं अपना व्यवसाय कर रहे हैं। विद्यालय में नाम लिखने की फीस प्रति छात्र ₹350 अलग से है।  बताया जाता है कि मान्यता प्राप्त स्कूलों में सरकारी विद्यालयों की भांति कक्षा 1 से 8 तक निशुल्क शिक्षा दी जाती है तथा मध्याह्न भोजन भी सरकार देती है परंतु मान्यता के नाम पर ऐसे विद्यालय छात्रों का भविष्य तो बिगड़ते ही हैं जमकर अंग्रेजी हिंदी उर्दू की शिक्षा देने के नाम पर छात्रों का धन उगाही भी करते हैं। सूत्र बताते हैं कि विद्यालय कॉलेज के अंदर किसी भी शिक्षक का नाम भी अंकित नहीं है जो शिक्षक पढ़ाते हैं उनको मात्र 3- 4  हजार रूपये  विद्यालय के मालिक द्वारा दिया जाता है। इसके अलावा छात्रों को विद्यालय से यूनिफॉर्म आदि खरीदने के लिए भी विवश करते हैं तथा यूनिफॉर्म जूता मोजा आदि खरीदने में भी मनमाना कमीशन लेते हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कमाऊ पूत होने के कारणअफसर इन लोगों की तरफ से आंखें बंद कर लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह मास्टर साहब जो स्कूल के मालिक भी बताए जाते हैं अच्छी शिक्षा देने के नाम पर जमकर धन उगाही ही भी करते हैं।

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