सहकारिता अधिकारी नहीं देते शिकायतों पर ध्यान
लखीमपुर खीरी Sep 08, 2025 at 06:30 PM , 126कार्यवाही न होने पर आयोग जाने का मन बना रहे पीड़ित
हरिशंकर मिश्र/सत्यदेव श्रीवास्तव
लखीमपुर खीरी। साधन सहकारी समितियों में व्याप्त भ्रष्टाचार कैसे रुके जब जनता की शिकायत पर उच्चाधिकारी ध्यान ही नहीं देते। मिली जानकारी के अनुसार
ताजा मामले में सिकटिहा निवासी सोहनलाल पुत्र पराग से उनके कर्जे को पुराना नया करने हेतु हजारों रुपए अवैध तरीके से लेने का आरोप लगाते हुए जब इसकी शिकायत पीड़ित किसान ने की तो बताते हैं कि सहकारिता एडीओ पटेल ने अनुज कुमार को बचा लिया उसके बाद इसी गांव की दलित महिला मीना देवी खाद लेने गई तो अनुज कुमार ने उसे टोकन दिया परंतु बाकी पैसे के लेनदेन को लेकर कहासुनी हुई तो अनुज कुमार ने खाद भी नहीं दी और न ही उसके पैसे वापस किया। इसके बाद महिला सचिव परमानंद तिवारी से मिली तो सचिव ने आश्वासन दिया कि 8 दिन के बाद आप आना मैं अनुज कुमार से पैसे वापस करवा दूंगा।
बताते हैं कि दलित महिला 8 दिन के बाद अपने पति पिंकू के साथ गई तो वहां पर इस अनुज कुमार से महिला पति की मार पीट हो गई जिससे पिंकू की पेंट फट गई परन्तु पैसे नहीं मिले। इसकी शिकायत पिंकू ने जिलाधिकारी खीरी व सहायक निबंधक सहकारिता से की परंतु हफ्ते दस दिन बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।
इस प्रकार सहकारिता विभाग के अफसरों ने दलित महिला के प्रार्थना पत्र कोई कार्यवाही नहीं की। लोग बताते हैं कि इस समिति का संचालक मंडल भी कुछ नहीं कर पाता है बल्कि मौका पड़ने पर वह भी इन्हीं लोगों के साथ खड़ा नजर आता है। पिंकू ने बताया कि हम अभी एक सप्ताह तक और कार्यवाही के लिए रास्ता देखते हैं उसके बाद में लखनऊ जाकर उच्च अधिकारियों मा0 राज्य महिला आयोग तथा अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष से मिलकर इन भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध शिकायत करेंगे।
ज्ञात हो कि विकासखंड फूलबेहड़ के मोजमाबाद किसान सेवा सहकारी समिति सुंदरवल में तत्कालीन सचिव कमाल अहमद खान ने शासनादेश की धज्जियां उड़ाते हुए समिति क्षेत्र के बाहरी आदमी की कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर शायद इसलिए नियुक्ति की ताकि यह समिति धराशाई हो जाए। बताया जाता है कि समिति के तत्कालीन सचिव कमाल अहमद की अनुकम्पा से कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर अनुज कुमार तैनाती पाने के बाद किसानों का कर्जे के नाम पर शोषण करने लगा तथा किसानों के कर्जे की लौटाई पलटाई अर्थात् नया पुराना करने के नाम पर खूब रकम बटोरने लगा। इतना ही नहीं समिति की पुरानी बिल्डिंग में भूसा भरकर भूसे का व्यापार शुरू कर दिया क्यों मीडिया के संज्ञान में आ गया और मामला अधिकारियों तक पहुंचा तब भूसे का धंधा बंद हुआ।






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