*हनुमान जयंती पर याद था संविधान, लेकिन बारहवफात पर खामोशी – पत्रकारिता या खुला पक्षपात?*

लखीमपुर खीरी , 143

लखीमपुर खीरी– शहर की सड़कों पर रोज़मर्रा का जाम अब जानलेवा होता जा रहा है। शुक्रवार को बारह वफात के जुलूस के दौरान मेला मैदान चौराहे पर एक एंबुलेंस करीब 10 मिनट तक जाम में फंसी रही। एंबुलेंस में मरीज जिंदगी और मौत से जूझता रहा, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त रही।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि हनुमान जयंती के दिन अनुच्छेद 25 और 26 का ज्ञान बांटने वाले तथाकथित पत्रकार आज कहां छिपे हुए हैं? क्या उनकी कलम की स्याही सूख गई है? जब हिंदू पर्व पर धार्मिक स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया जाता है, तो मुस्लिम पर्व पर यह संवैधानिक ज्ञान क्यों याद नहीं आता?

क्या यही पत्रकारिता है या खुला पक्षपात? जनता पूछ रही है कि क्या पत्रकारों का धर्म और विचारधारा देखकर ही सच सामने लाया जाएगा? 

लखीमपुर खीरी के लोग अब सवाल उठा रहे हैं – जब एंबुलेंस तक को 10 मिनट तक जाम से राहत नहीं मिल पा रही, तो जिम्मेदार आखिर कर क्या रहे हैं? और सबसे अहम – ऐसे मौकों पर ‘खामोश’ रहने वाले पत्रकारों की पत्रकारिता पर अब भरोसा कौन करे?

Related Articles

Comments

Back to Top