ऐसे ब्रॉड गेज से तो मीटर गेज ही भला कब होगा जनाकांक्षाओं के अनुरूप ट्रेनों का संचालन

लखीमपुर खीरी , 145

 के0के0 शुक्ला/हरिशंकर मिश्र 

लखीमपुर खीरी। लगभग 8 साल लगाकर मीटर गेज से ब्रॉड गेज में परिवर्तन किए गए लखनऊ सीतापुर लखीमपुर मैलानी बरेली रेल पथ के कार्य को सम्पन्न हुए लगभग 2 वर्ष हो रहे हैं परंतु जितनी उम्मीद क्षेत्र की जनता जनार्दन को थी उस पर रेलवे विभाग ने पानी ही फेर दिया है और मात्र कुछ ट्रेनों का संचालन कर अपने कर्तव्यों की इति श्री कर ली है। लोगों को यह उम्मीद थी की ब्रॉड गेज की लाइन बढ़ाने के बाद यह क्षेत्र देश से ब्रॉड गेज के जरिए पूर्णतया जुड़ जाएगा और विकास के रास्ते इस क्षेत्र के लिए भी खुल जाएंगे परंतु अभी तक रेलवे द्वारा की गई कार्यवाही से ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया जिससे क्षेत्र की जनता इससे लाभान्वित हो। तमाम टुकड़ों में किए जा रहे रेल संचालन से लोगों की जाने आने में मुसीबतें और बढ़ गई हैं और वही कहावत चरितार्थ हो गई की चौबे जी गए थे छब्बे बनने और दुबे बनकर लौट आए। अब तो लोग यह मानने लगे हैं कि इससे अच्छा तो मीटर गेज ही लाइन थी थोड़ा घंटा डेढ़ घंटा का समय अधिक लग जाता था और लखनऊ या बरेली पहुंचकर लोग अपने गंतव्य के लिए ट्रेनें पकड़ लेते थे। 
लोगों का मानना है कि पहले रेलगाड़िया का संचालन एक समय बद्ध तरीके से चल रहा था जो जनता के हिसाब से था परंतु बड़ी लाइन बनने के बाद रेल संचालन का पुराना हिसाब किताब बिल्कुल ध्वस्त हो गया है। अभी तक रेलवे इस लाइन पर उतनी भी ट्रेनों का संचालन नहीं कर पाया है जो इस पर चल रही थी।
मालूम हो की अमान परिवर्तन के समय भी करीब दो दर्जन अप डाउन ट्रेनों का संचालन लखीमपुर होकर था। उससे पहले तो इस लाइन पर आगरा जयपुर कानपुर तक के लिए जनता को सीधी रेल सेवा मिल जाया करती थी परंतु कालांतर में इस लाइन पर ज्यों ज्यों गेज बदलता गया त्यों त्यों लंबी दूरी वाली ट्रेनों के संचालन के स्टेशन कम होते रहे जनता जनार्दन को यह उम्मीद थी कि बड़ी लाइन बनने के बाद इस लाइन पर लोकल रेल गाड़ियों के अलावा लंबी दूरी की भी रेलगाड़ियां आसानी से मिल जाया करेंगी परंतु पूरी लाइन कंप्लीट होने के बाद ऐसा कुछ नहीं हुआ जनता को मात्र कुछ ट्रेनों का बेतरतीब ढंग से संचालन कर झुनझुना पकड़ा दिया गया।
   मैलानी जंक्शन से गोंडा जाने वाली लाइन पर भी स्थिति और भी खराब हो गई है उसे लाइन पर भी वन विभाग की आपत्ति बता कर ट्रेनों के संचालक को पूर्णतया बाधित करने का प्रयास जारी है। इस लाइन में विभाग के झूठ का खुलासा उसे समय हुआ जब विभाग ने इस लाइन पर संचालन बिल्कुल बंद कर दिया क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जब मामले को हाई कोर्ट पहुंचाया तो विभाग द्वारा बोले जा रहे हैं झूठ का खुलासा हुआ कि एक मनगढ़ंत फर्जी आदेश बताकर ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया बताते हैं जब हाई कोर्ट ने उस आदेश को दिखाने को कहा तब उसे झूठ का खुलासा हुआ तब भी ट्रेनों के संचालन बंद करने के अन्य कारण बताए गए जिससे न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ और अधिकारियों को फटकार लगाते हुए ट्रेन संचालन जारी रखने के आदेश दिए। इस लाइन के मामले में अधिकारियों के लापरवाही व बहाने बाजी के चलते यह लाइन अमान परिवर्तन के दायरे में नहीं आ सकी। वर्तमान में भी इस लाइन को बंद करने हेतु तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे हैं जबकि उन तर्कों पर न्यायालय में चर्चा भी हो चुकी है परंतु हमारे देश की अफसरशाही शायद न्यायालय से भी ऊपर हो चुकी है।

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