लखीमपुर खीरी में आजादी के 78 साल बाद अंग्रेज के नाम से सरकारी विलोबी मेमोरियल ट्रस्ट,मैदान, मार्केट
लखीमपुर खीरी Aug 17, 2025 at 04:20 PM , 587लखीमपुर खीरी। 26 अगस्त 1920 को तीन युवक स्वतंत्रता सेनानियों नसीरुद्दीन, माशूक, बशीर निवासी मो थर्वरनगंज नगर लखीमपुर ने तलवार से तत्कालीन कलेक्टर विलोबी का सर काट कर मर्डर कर दिया था। ब्रिटिश इम्पायर हिल गया था। तीनो को ब्रिटिश पुलिस ने तत्काल हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। जिला जज सीतापुर की अदालत में ट्रायल हुआ। 1920 में ही तीनो को फांसी पर चढ़ा दिया गया। उत्तरप्रदेश सरकार ने स्वतंत्रता के बाद इन तीनो को शहीद का दर्जा दिया।
आंग्रेजो ने बनाया विलोबी मेमोरियल हाल
1920 में ही ब्रिटिश हुकूमत ने अपने कलेक्टर की याद में भव्य विलोबी मेमोरियल हाल भवन का निर्माण कराया। 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ पर ट्रस्ट विलोबी की यादगार में है। इसी विलोबी ने लखनऊ तैनाती के दौरान गोली चलाई थी, कई भारतीय मारे गए थे। विलोबी हाल के पास करीब 12 एकड़ का मैदान है जहां मेला, शादी ब्याह आदि होते है। जिसके लिए धन लिया जाता है। इसी मैदान पर बाद में 50 दुकाने बनाई गई है।
1924 में अंग्रेजों ने विलोबी मेमोरियल ट्रस्ट का पंजीकरण कराया
1924 में अँग्रेजों ने विलोबी मेमोरियल ट्रस्ट का पंजीकरण कराया। तत्कालीन अंग्रेज कलेक्टर ट्रस्ट का अध्यक्ष था। लखीमपुर निवासी कई सदस्य थे। सरस्वती प्रसाद सचिव थे। उनके निधन के बाद उनके पुत्र लक्ष्मी नारायण आगा सचिव बने। आगा के निधन के बाद उनके बेटे वीरेंद्र कुमार और उनके निधन के बाद उनके बेटे अजय आगा सचिव बने जो आज भी है। 101 साल से एक ही परिवार का सचिव है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित विलोबी का नाम हटाने की जिद पर अड़े
लखीमपुर खीरी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित मांग कर रहे है कि गुलामी के प्रतीक विलोबी का नाम ट्रस्ट से हटाया जाए।विचित्र बात यह है कि जो ट्रस्ट अंग्रेज के नाम पर है उसकी अध्यक्ष खुद जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी है। जमीन सरकारी ,दुकानें सरकारी हैं।भवन सरकारी है। आश्रितों का कहना है कि विलोबी का नाम शहीदों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को चिढ़ा रहा है। यह आश्रितों का अपमान है। आश्रित इस मांग को लेकर धरने पर भी बैठ सकते हैं।






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