सेहत महकमा को बेनकाब करने का इनाम चालान
लखीमपुर खीरी Aug 12, 2025 at 06:57 PM , 181अपनों के कृत्यो का पर्दाफाश होते देख पत्रकार का छीना मोबाइल और वीडियो डिलीट करने के बाद लिखाया गया फर्जी मुकदमा
यदि इसी तरह सच को उजागर करने वाले मीडिया जगत दबाया और फंसाया जाता रहा तो कौन लिखेगा खबर
लखीमपुर खीरी । जिला खीरी में चल रही अफसर शाही की तानाशाह रवैया की एक ऐसी मिसाल सामने आई जिसने सूबे के मुखिया के सभी दावों और वादों की हवा निकाल दी और जनपद में नौकरशाही के आगे अफसर शाही की कोई अहमियत नहीं है । जिले में सिर चढ़कर बोल रही नौकरशाही के चलते लोगों का विश्वास वर्तमान सरकार से उठता जा रहा है।और सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ जरूरतमंद गरीब तबके के लोगों तक नहीं पहुंच रहा है।भले ही उत्तर प्रदेश में योगी की सरकार द्वारा गरीब मजलूमों वंचित तबके के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करने को लेकर पानी जैसा पैसा बहाया जा रहा हो पर यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह जाता है। और गरीब सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट अस्पताल की तरह पैसा खर्च करने के बाद भी सरकारी अस्पतालों में इलाज करने को विवस है। ताजा मामला जनपद खीरी के जिला अस्पताल ओयल मोतीपुर का है। जहां पर जिला अस्पताल के मरीजों को धड़ल्ले से दुगनी एमआरपी वाली महंगी कमीशन वाली दवाइयां बाहर से मेडिकल स्टोर से लिखी जा रही है। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि ऑपरेशन के नाम पर 4000 से लेकर 6000 रूपया तक सर्जन लोगों द्वारा अपने प्राइवेट लड़कों द्वारा वसूल करने के बाद ही ऑपरेशन किया जाता है। इतना ही नहीं गति महा पूर्व एक मरीज से टांका लगाने वाला धागा तक यह कहते हुए मंगवाया गया कि यहां धागा अच्छा नहीं है । अधिकांश ऑपरेशन के समय बाहर से दवाएं मरीज को खरीदनी पड़ती है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक और पैथोलॉजी से लेकर अल्ट्रासाउंड सेंटर तक दलालों और चंद आशाओं के माध्यम से जांच के नाम पर वसूली होने का खेल चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला दिनांक 10, 8.2025 की रात समय लगभग 1 बजे का होगा जब पत्रकार शमशेर अपने एक साथी विशाल भारद्वाज के साथ जिला अस्पताल अपने एक मरीज जिला अस्पताल में आने की सूचना पर गए। और मरीज का पता किया तो पता चला कि मरीज नहीं आया है। वहीं पर उक्त लोगों को एक जानकारी विभागीय सूत्रों द्वारा ही मिली तीन मंजिल वार्ड में सभी ड्यूटी पर लगे स्थाई कर्मी खर्राटे मार रहे हैं और मरीज दर्द से कराह रहा है। उक्त सूचना पर गए दोनों पत्रकारों द्वारा उक्त मामले का वीडियो कैमरे में कैद कर लिया गया। वार्ड के पास बैठा गार्ड भी बैठे-बैठे नींद का लुत्फ ले रहा था। इसकी भनक जब अस्पताल कर्मियों को लगी तो वहां पर आए अस्पताल कर्मी वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाने लगे और पत्रकारों द्वारा ऐसा करने से मना करने पर उक्त लोगों द्वारा मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट कर दिया गया। इसकी सूचना पत्रकार ने अपने साथियों को दी तो मौके पर पहुंचे पत्रकार नित्यानंद वाजपेई वह मनोज मिश्रा ने मामले की जानकारी ली तब उग्र होकर अस्पताल कर्मियों द्वारा फर्जी आरोप लगाते हुए मुकदमा पंजीकृत कराकर मामले को दबाने का प्रयास करने लगे इस तरह से सच्चाई को सामज में आईना करना पत्रकारों को भारी पड़ गया।
आप ही वादी आप ही डॉक्टर तो जांच कहा होगी सही
पुलिस द्वारा उन्ही डॉक्टर से शराब पीने पुष्टि की जांच कराई गई जब वही वादी मुकदमा वहीं डॉक्टर तो जांच में जो चाहे वो लिख दे। यदि मामले की कराई जाए निष्पक्ष जांच और ईमानदारी से खागाले जाएं सभी वार्डों के सीसीटीवी फुटेज तो होगा दूध का दूध पानी का पानी सीसीटीवी कैमरा ही बताएगा कि कौन था और किसने छेड़छाड़ की तो सच आ जाएगा सामने। मामले की आरटीआई से सीसीटीवी फुटेज की मांग की गई है। लोगों की जुबानी सत्य माने तो रात को 50 रुपए में मिलने वाला इंजेक्शन खरीदवाया जाता है। यह भ्रष्टाचार नहीं है तो क्या है। एक डॉक्टर 20 साल से एक ही जगह जमा हुआ है क्या यह स्थानान्तरण नीति की अवमानना नहीं है। इन सबको शासन के समक्ष लाना अपराध है और भ्रष्टाचार का खुलासा करना अपराध है तो हमने यह अपराध किया है।






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