*छोटे किसानों के साथ सौतेला व्यवहार, सहकारी समिति सैदापुर में खाद वितरण में खुला भेदभाव*
लखीमपुर खीरी Aug 07, 2025 at 06:05 PM , 136*सैदापुर* - *खीरी* ।
जहां एक ओर सरकार किसानों को समय पर खाद देने का दावा करती है, वहीं ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। सैदापुर सहकारी समिति में हो रहा खाद वितरण, छोटे किसानों के लिए एक पीड़ादायक संघर्ष बन चुका है। दो-दो दिन से लगातार बारिश और धूप में खड़े रहकर भी छोटे किसानों को यूरिया खाद नहीं मिल पा रही है।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि समिति में खाद वितरण भेदभावपूर्ण और पक्षपातपूर्ण तरीके से किया जा रहा है। समिति से जुड़े लोगों या 'सांठगांठ' रखने वालों को लाइन में लगे बिना खाद मिल रही है, जबकि छोटे किसानों को घंटों इंतजार के बाद अगले दिन आने का कहकर लौटा दिया जाता है।
"हम छोटे किसान हैं, इसलिए क्या हमें जीने का हक नहीं?" — एक परेशान किसान ने रोष जताते हुए कहा।
कई किसानों ने यह भी बताया कि खाद वितरण की सूची में ऐसे नाम शामिल हो जाते हैं, जो न लाइन में दिखते हैं, न ही आसपास होते हैं, लेकिन उन्हें पहले खाद मिल जाती है।
छोटे किसान बताते हैं कि अगर वे शिकायत करते हैं, तो उन्हें धमकाया जाता है या बिल्कुल खाद से वंचित कर दिया जाता है। समिति सचिव से जब किसान अपनी समस्या बताने जाते हैं, तो उन्हें टाल दिया जाता है या उपेक्षित कर दिया जाता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिनके पास 'पावर' है, या जो अधिकारियों से जुड़े हुए हैं, उन्हें बिना किसी झंझट के खाद मिल जाती है।
यह सवाल भी बड़ा है कि जब ज़िले की कलेक्टर खुद कह चुकी हैं कि खाद की कोई कमी नहीं है, तो फिर छोटे किसानों के हिस्से की खाद आखिर किसकी जेब में जा रही है?
प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत इस मामले की जांच करे और सुनिश्चित करे कि खाद का वितरण पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो।
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह व्यवस्था छोटे किसानों का भरोसा खो देगी, जो पहले ही कर्ज, मौसम और महंगाई की मार झेल रहे हैं।






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