स्वतन्त्र भारत में "विलोबी"नाम परिवर्तन आवश्यक

लखीमपुर खीरी , 130

लखीमपुर-खीरी । भारतीय" स्वतन्त्रता दिवस "स्वतन्त्रता के 78 वर्ष पूर्ण  कर 79 वें वर्ष में अपनें अतीत के स्वातन्त्र्य दर्शन  आन्दोलन कारियों के देश भक्ति के जज़्बे को नमन कर आज़ादी का जश्न "भारतीय स्वतन्त्रता दिवस " को हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाने के लिए  प्रत्येक भारतीय उत्साहित है ।
 लखीमपुर-खीरी की यह वसुधा देश भक्ति की उन अमर शहीदों की वह दास्तां बयां करती स्वतन्त्रता संग्राम की संचेतनाओं का गगन भेदी उद्घोष  "वन्देमातरम " के साथ  नयी पीढी को सन्देश देती है कि अपनी स्वतन्त्रता की रक्षा अक्षुण बनाए रखनें का दायित्व उन्हीं के कन्धों पर है ।
 हमारे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों नें देश की आजादी के लिए कृत संकल्पित होकर अपनें लक्ष्य तक "इन्कलाब जिन्दाबाद" के साथ डटे रहे । ज्ञात अज्ञात सभी स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों की आत्मकथा आत्म बोध का स्वर्णिम प्रबोधन है ।
 स्वतन्त्र भारत में जनपद खीरी का भी विशेष योगदान रहा है। ब्रिटिश हुकूमत में बनी इमारत जो शहर के बीचोबीच में स्थित है। उसे आज भी विलोबी हाल , विलोबी मैदान,  विलोबी मार्केट,  पुस्तकालय के नाम से ही जाना जा रहा है । आज यह परिसर मादक द्रव्य, पदार्थों ,नशेडियों,जुआडियों, अराजक तत्वों और बेशुमार गन्दगी का अड्डा बना हुआ है । जिला खीरी के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियो के नाम की जगह आज भी विलोबी के नाम से ही जाना जा रहा है ।
 सर्वाधिक चिन्तनीय विषय यह है कि जहाॅ एक ओर भारत सरकार स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे रही है वहीं पर यह विलोबी इमारत की परिधि में भीषण गन्दगी का प्रकोप,बीमारियों के संक्रमण का खतरा,घोर अव्यवस्था,अराजक तत्वों का जमावडा तथा " बेटी बचाओ, बेटी पढाओ" के नारे के विपरीत बालिका शिक्षा के केन्द्र बिन्दु भी प्रभावित हो रहे  हैं ।
 विलोबी के ठीक बाॅए गाॅधी बालोद्यान , चिल्ड्रेन्स अकेडमी, स्वस्थ विभाग का कार्यालय, पूरब में बेसिक शिक्षा परिषद का सदर स्कूल, निवर्तमान केन्द्रीय विद्यालय/छात्रावास, अम्बेडकर पार्क, दाहिने स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी श्री राज नारायण मिश्र स्मृति नेत्र चिकित्सालय, गाॅधी उद्यान,पश्चिम में बाबा रामदेव जी का आयुर्वेदिक आरोग्य औषधालय, राजकीय कन्या इण्टर कालेज, सनातन धर्म  सरस्वती बालिका विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज संचालित हैं।
 जहाॅ एक ओर गन्दगी तथा अंग्रेजी हुकूमत को महिमामंडित करती विलोबी इमारत भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की इबारत गढती नजर आ रही है । गुलामी की याद दिलाता और   गन्दगी का वातावरण "स्वच्छ भारत अभियान " को चुनौती देता अभियान की तर्ज पर एक आदर्श भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम सेनानीके नाम पर रचनात्मकता के आभास का नवसृजन इस नगर को नव सन्देश देगा और पराधीनता के कलंक से स्वाधीनता के वातायन में राष्ट्रीय पताका गर्वित होगी ।
 इस जनपद में स्वतन्त्रता आन्दोलन मे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों ने अपने जौहर दिखाए है। जिनमें नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आन्दोलन  भारत छोडो आन्दोलन की ज़मीनी हकीकत बयां करते पॅ. रामासरे शुक्ल  के नेतृत्व में 1930 में 12बेतों की सजा पाकर आन्दोलन को ऊर्जा प्रदान की थी ।
साहित्य एवं शौर्य की गाथा में ठा.करन सिंह, शिव प्रसाद नागर,मकुन्द राम धवन आदि स्वतन्त्रता संग्राम के मजबूत स्तम्भ थे। 26अगस्त 1920को तीन सेनानियों  नसीरुद्दीन मौजी,माशूक और बशीर ने तत्कालीन ब्रिटिश जिलाधिकारी को मौत के घाट उतार कर फाॅसी पर चढ गए थे ।
 अवधी सम्राट पॅ.बंशीधर शुक्ल ने जेल में रहकर " खूनी परचा "की रचना की जिसने पूरे देश के कोने-कोने मे जोश भर दिया था -
"अमर भूमि से प्रकट हुआ हूॅ , मर-मर अमर कहाऊॅगा ।
जब तक तुझको मिटा न दूंगा, चैन न किंचित पाऊंगा ।।
 ने ऑग्ल शासन की जडें हिलाकर रख दी थीं।
आज आवश्यकता है कि लखीमपुर-खीरी के मुख्यालय पर बनें विलोबी का नामकरण किसी स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी के नाम पर महिमामंडित कर स्वतन्त्रता दिवस का जश्न मनाया जाय।

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