जय काली कलकत्ते वाली कहो और संग्राम करो...

लखीमपुर खीरी , 2016

लखीमपुर खीरी। जनपद के ख्याति लब्ध ओज के कवि अनिल शुक्ल अमल के संयोजन एवं स्वामी यतीन्द्राचार्य जी महाराज की अध्यक्षता एवं स्वामी संतोष दास खाकी जी महाराज के मुख्य आतिथ्य में अष्टम भू वैकुंठ श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर घाट नैमिष में श्री लक्ष्मी नृसिंह ऊर्जा यज्ञ सहित गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अष्टदिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत गुरुजनों के सानिध्य में हुए बहुत ही शानदार कवि सम्मेलन में सभी कवियों ने श्रोताओं को मोहित किया। विशेष शर्मा के आनन्द दायक संचालन में लोकप्रिय गीतकार जगजीवन मिश्र की वाणी वंदना और उनके गीतों,प्यार मां जैसा हो वारि गंगा मिले,
ना मिले लूट और न ही दंगा मिले... को सबने सराहा, भगवान सहाय की कविताओं का जादू दिखा, एक बार फिर से भारत ने दुश्मन को ललकारा है,
गरजा है राफेल गगन में तेजस भी हुँकारा है,
तुझको तेरे कर्मों का हमने अंजाम दिया है ये,
धर्म पूछ कर मारा था तो धर्म बता कर मारा है। विशेष शर्मा  की हास्य और संदेश परक कविताएं, 
छिपे आदमिन मा फ़रिश्ते चले गए,
रुपया जो आवा तो रिश्ते चले गए ,खूब सराही गईं।
शुभम् शुक्ला ने पढ़ा 
तुम जरूरत हो मेरी मगर,
मेरी जां से ज़ियादा नहीं हो।
तुम बहुत खूबसूरत हो लेकिन,
मेरी मां से ज़ियादा नहीं हो।
ने बढ़िया काव्य पाठ किया। सर्वांत में कवि सम्मेलन के संयोजक लखीमपुर खीरी के वीर रस के कवि अनिल अमल ने अपनी ओजस्वी कविताओं से माहौल को देशभक्ति मय किया उन्होंने बंगाल हिंसा की घटना पर पढ़ा, 
अभी जला मुर्शिदाबाद तो समझो केवल झांकी है ,ममता की समता गायब है अभी क्रूरता बाकी है 
जलकर मर जाने से अच्छा दुश्मन का काम तमाम करो।
जय काली कलकत्ते वाली कहो, और संग्राम करो ।। इसके बाद मंच पर उपस्थित दोनों गुरुजनों ने सभी को अपना आशीर्वाद देकर इस कार्यक्रम का समापन किया।

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