“यह संसार झूठा, सत्य केवल परमेश्वर : महात्मा कमल दास जी”

लखीमपुर खीरी , 985

लखीमपुर खीरी। सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में जनता उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण, महुआरी, पथरदेवा में धर्म -धर्मात्मा-धरती रक्षार्थ चल रहे सत्संग कार्यक्रम में बोलते हुए महात्मा कमल दास ने कहा, यह संसार जैसा दिख रहा है इसकी यथार्थता वैसा नहीं है। यह दिखता जरूर है लेकिन जिस प्रकार अंधेरे में रस्सी भी सर्प जैसे प्रतीत होती है, इसी प्रकार ये संसार अज्ञान की अवस्था में सत्य जैसा दिखाई देता है। जैसे “झूठहू सत्य जाहि बिनु जाने, जिमि भुजंग बिनु रजु पहचाने” उन्होंने इसका अर्थ समझाते हुए कहा, यह संसार है तो झूठ लेकिन यथार्थ ज्ञान न होने के कारण यह सब सत्य प्रतीत होता है और जब भगवान असीम कृपा करके सदगुरु रूप में ज्ञान देते है तब यह स्पष्ट देखने को मिलता है की नही यह संसार सत्य नही बल्कि सब असत्य है, “जेहि जाने जग जाए हेराई, जागे जथा सपन भ्रम जाई”।  जैसे जब ज्ञान रूपी प्रकाश रस्सी रूपी संसार पर पड़ता है तब दिखाई देता है की संसार बद से भी बदतर झूठा है। हमारे सदगुरु देव परमपूज्य संत ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परहंस ने ज्ञान दृष्टि देकर दिखाया की देखो एक मात्र परमब्रम ही सत्य है बाकी सारा संसार मिथ्या है। शंकर जी एकबार पार्वती जी से अपना अनुभव सुनाते हुए कहते हैं, “उमा कहहूं मैं अनुभव अपना, सत हरि भजन जगत सब सपना” परन्तु सन्त ज्ञानेश्वर जी ने यह संसार को स्वप्न से भी बदतर झूठा दिखाया है। अर्थात स्वप्न तो कुछ है परन्तु यह संसार स्वप्न बराबर भी नहीं है। सत्संग के पश्चात महात्मा दीपकानन्द के भजन “ ये माया तेरी बहुत कठिन है राम” ने श्रोताओं का मन मोह लिया।

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