पांच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर निकाली गई कलश शोभायात्रा

लखीमपुर खीरी , 158

लखीमपुर खीरी। कलश भारतीय संस्कृति का आधार है। सनातन धर्म का प्राण है कलश। कलश में तेंइतीस कोटि देवताओं का निवास होता है। कलश विश्व ब्रह्माण्ड का प्रतीक है। वैदिक संस्कृति में कोई भी पूजन विना कलश के नहीं होता है।जिन माताओं बहनों का बड़ा सौभाग्य होता है उन्हें ही सिर पर कलश धारण करने का अवसर प्राप्त होता है। उक्त विचार हैं श्री वेदमाता गायत्री प्रचार समिति के संस्थापक अध्यक्ष यज्ञाचार्य पं राजेश दीक्षित के जिन्होंने शारदानगर के निकट श्री वेदमाता गायत्री प्रज्ञा पीठ रौली रामापुर में पांच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर निकाली गई कलश शोभायात्रा को संबोधित करते हुए कहे।कलश शोभायात्रा में सैकड़ों माताओं बहनों ने प्रज्ञा पीठ रौली से सिर पर कलश धारण करके शारदा नहर से कलशों में पूजन अर्चन के साथ जल भरकर श्री वेदमाता गायत्री प्रज्ञा पीठ रौली की पांच कुण्डीय यज्ञशाला में स्थापित कर आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कलश यात्रा का समापन किया गया।29 मई को देव पूजन के साथ पांच कुण्डीय यज्ञशाला में यज्ञ किया जाएगा।

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