सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् का सत्संग, भजन-कीर्तन एवं वैशाखी महोत्सव १३ से

लखीमपुर खीरी , 117

हरिद्वार/लखीमपुर।  सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में वैशाखी के पावन अवसर पर 13 अप्रैल से श्री हरिद्वार आश्रम, रानीपुर मोड, इंडस्ट्रियल एरिया, हरिद्वार में धर्म-धर्मात्मा-धरती रक्षार्थ सत्य-धर्म-न्याय-निति संस्थापनार्थ सत्संग एवं भजन कीर्तन कार्यक्रम शुभारंभ होगा । उक्त कार्यक्रम 16 अप्रैल तक  चलेगा। 17 अप्रैल को विशाल भगवद शोभा यात्रा निकाली जाएगी। संस्था के अधिकारी कमल जी ने कहा आज  भ्रष्टाचार का जड़ इतना फैल चुका है कि इससे धर्म क्षेत्र भी नहीं बच पाया है। क्योंकि भगवान् एक था एक है एक ही रहने वाला परम सत्ता शक्ति है जो दो भी नहीं होता परन्तु आज हर महत्वाकांक्षी गुरु जी लोग सद्गुरु, जगतगुरु, श्री श्री श्री 108 श्री अनंत श्री आदि आदि पदवी ले लेकर अपने शिष्यों में भगवान् बन रहे हैं और उनके धन और धर्म भाव का शोषण कर रहे हैं , जब की ये गुरु जी लोग शरीर में रहने वाले चेतन जीव को भी नहीं जानते और न परमात्मा को ही जानते हैं , नाजानकारी में आत्मा को ही जीव और आत्मा को ही परमात्मा घोषित करने कराने में लगे हैं, जबकि हर मामला में तीनों तीन अलग अलग हैं। तीनों का नाम-रूप-गुण-लक्षण-प्रभाव-उपलब्धि-विधान सब अलग अलग है।  महात्मा दशरथ ने कहा, भगवान विष्णु-राम-कृष्णजी ने जिस ‘तत्त्वज्ञान’ को अपने समर्पित-शरणागत भक्त-सेवकों को देकर परमेश्वर के जिस विराटरूप का साक्षात् दर्शन कराया था, वर्तमान में सन्त ज्ञानेश्वर जी ने अपने भक्त-सेवकों को उसी तत्त्वज्ञान को देकर जीव-आत्मा-परमात्मा का आमने-सामने बातचीत के साथ साक्षात दर्शन कराया है। महात्मा जी ने आगे कहा की उस तत्त्वज्ञान में यह स्पष्ट दिखलाई दिया कि श्री विष्णु-राम-कृष्ण के शरीर में अवतरित हो कर जिस परमतत्त्वम परमात्मा ने कार्य किया था , उसी परमतत्त्वम ने सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस के शरीर में अवतरित होकर धर्म संस्थापन का कार्य किया है। अगर कोई जांच करना चाहता है तो कर सकता है इस संस्था में उक्त जांच का भी प्रावधान है। 
 महात्मा जी ने आगे कहा कि इस संस्था का एकमात्र उद्देश्य धर्म-धर्मात्मा-धरती की रक्षा ही है। असत्य-अधर्म-अन्याय-अनीति को समूल समाप्त कर सत्य-धर्म-न्याय-निति को समाज में लागू करने हेतु सन्त ज्ञानेश्वर जी के सकल शिष्य समाज संकल्पित एवं समर्पित हैं। कार्यक्रम के लिए देश विदेश से भक्त सेवक आए हुए हैं।

Related Articles

Comments

Back to Top