शांति दूत पत्रिका(विश्व की सबसे लंबी कविता)
लखीमपुर खीरी Apr 01, 2025 at 07:45 PM , 148(प्रस्तुति के0के0शुक्ला)
रोक दो विप्लव दया कर
कह रहा हूं आजकल ।,,,,,
मानव तेरी चेतना
इतिहास रच देगी धवल ।,,,,,,
जानते हो क्यों?
किस तरफ हो बढ़ रहे।
प्राप्ति होगी क्या !
युद्ध के उन्माद से।
मजहबों की बात कर,
आतंक को देकर शरण।
नाश अरु उन्माद से क्या?
हो सकेगा जागरण। ,,,,,,,
रोक दो विप्लव दया कर
कह रहा हूं आजकल।,,,,
मानव तेरी चेतना
इतिहास रच देगी धवल।,,,,,,
कौन सा है धर्म जिसमें
आतंक को पोसा गया।
देह लिप्सा , राज सुख हित
मनुजता को कोसा गया।
धर्म नफरत कब सिखाता
त्याग का जलता दिया।
सार्वकालिक, सार्वभौमिक
वशुधैवता पीकर किया।
धर्म है थाती नहीं, ऐक
व्यक्ति के ईमान की।
धर्म जबरदस्ती नहीं
आतंक के श्रीमान की।
हिन्दू मुस्लिम शिख ईसाई
हर यहूदी शान है।
जैन बुद्ध पारसी भी
मनु जाति का सम्मान है।
तावो,ओशो,कन्फ्युशियस
नर जाति का सत मान है।
सत्य को जानने का
ऐक ही प्रमाण है।
सब सनातन धर्म पंथज,
विदित सत्यायन गान है।
बस सनातन से मिल सकेगा
सर्व पंथों का सुफल।,,,,,
रोक दो विप्लव दया कर
कह रहा हूं आजकल।,,,,,
मानव तेरी चेतना
इतिहास रच देगी धवल।,,,,
-कवि डॉ0 प्रेम गिरि






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