युवराज दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय अर्तसम्बन्ध" विषय सगोष्ठी का आयोजन

लखीमपुर खीरी , 150

युवराज दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लखीमपुर-खीरी में आज दिनाँक 21.11.2024 को विश्व दर्शन दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा "लोक कल्याण में दर्शनशास्त्र की उपादेयता एवं इसके अन्य विषयों के साथ अर्तसम्बन्ध" विषय सगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम
का शुभारम्भ प्राचार्य प्रो० हेमन्त पाल, मुख्य अतिथि आरती श्रीवास्तव, जिला सचिव रेडक्रास एवं दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो० सुभाष चन्द्रा द्वारा माँ सरस्वती एवं राजा युवराज दत्त सिंह जी के चित्र पर माल्यापर्ण व द्वीप प्रज्जवलन कर किया गया। इसी क्रम में छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया। विश्व दर्शन दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो० सुभाष चन्द्रा ने बताया कि विश्व दर्शन दिवस ऐसे सभी दार्शनिक, वैज्ञानिक, चिन्तक और लोक नायकों के सम्मान में मनाया जाता है,जिन्होंने सम्पूर्ण विश्व के लोगों को स्वतंत्र विचारों के लिए प्रेरित किया। विश्व दर्शन दिवस का उद्देश्य स्वतंत्र एवं नवीन वैचारिकी के साथ-साथ मौलिक समस्याओं एवं समसामयिक चुनौतियों के समाधान तथा लोक कल्याण के लिए चिन्तन को बढ़ावा देना है। दर्शन सार्वभौमिक अभिव्यक्ति है, जिसके मूल में लोक कल्याण निहित है और दर्शन ने ही सत्यम्, शिवम् सुन्दरम् का समन्वय करते हुए न्याय, प्रेम व बंधुता की भावना को सम्भव बनाया है। मुख्य अतिथि रेडक्रस की जिला सचिव आरती श्रीवास्तव ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि दर्शन जीवन के अनुभवों को समझने एवं दिशा निर्धारित करने का प्रयत्न है। मैंने शिक्षण-प्रशिक्षण से जो ज्ञान अर्जित किया उसे समाज हित से जोड़कर देखा और आपदा में मानवता के उत्थान के लिए स्वयं को समर्पित कर कार्य कर रही हूँ। मेरी समझ से मानव एवं जीवमात्र की सेवा ही दर्शन है। बी०एड०
विभागाध्यक्ष प्रो० विशाल द्विवेदी ने कहा कि दर्शन मानवीय मूल्यात्मक चेतना की सरल अभिव्यक्ति है, जिससे जीवन के नियामक पक्षों का निरूपण होता है। वास्तव में दर्शन मानवीय आचरण का विवेचन कर जीवन के उच्च आदर्शों तक पहुँचने के लिए पृष्ठभूमि तैयार करता है। योग साधना इसमें सहायक होती है। संगोष्ठी में प्रो० नीलम त्रिवेदी ने दर्शन की उपादेयता को कविता के माध्यम से व्यक्त करते हुए कहा कि दर्शन सकारात्मक चितन है, जिससे अनुप्राणित होकर मनुष्य अपनी शक्ति को नवनिर्माण में लगाता है। दर्शन ज्ञान के प्रति प्रेम है।जो उच्च आदर्शों को स्थापित करता है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्च प्रो० हेमन्त
पाल ने कहा कि दर्शन मुक्त विचार की जीवन साधना है। जो सर्वविधि पक्षपात से पूर्णता मुक्त होकर जीवन
और जगत की विराट बौद्धिक व्याख्या करते हुए लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त कराती है। दर्शन ने ही
विश्वव्यापी एवं कल्याणकारी जीवन मूल्यों की आधारशिला निर्मित की है। दर्शन की प्रक्रिया सूक्ष्म, व्यवस्थित और होती है। दर्शन वास्तव में आत्मावगति है। विद्यार्थी दार्शनिक दृष्टिकोण अपनाकर अपनी बैद्धिक क्षमता को विकसित करते हुए सफल नागरिक बने और राष्ट्र निर्माण में आगे आये। कार्यक्रम का सफल संचालन दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो० सुभाष चन्द्रा ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक डा० आर०पी०एस०तोमर, डा० जे०एन० सिंह, प्रो० नूतन सिंह, प्रो० एस०के० पाण्डेय, प्रो० ज्योति पन्त, डा० मनोज कुमार, श्वेतांक भारद्वाज, सौरभ वर्मा, दीपक बाजपेई, रचित कुमार, सतेन्द्र पाल सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें।

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