लाशों के सौदागर डॉक्टर्स की अजीब दास्तां!

लखीमपुर खीरी , 167

शहर के नामी-गिरामी मशहूर हॉस्पिटल के 'डॉक्टर्स' की सच्चाई जान कांप जाएगी रूह...

लखीमपुर में सच होती दिखी ‘गब्बर’ की कहानी, मुर्दे को किया रेफर


इस अस्पताल में ‘गब्बर इज बैक’ जैसा सीन, इलाज के नाम पर लूट-खसोट, मरे हुए शख्स को किया रेफर 

मृतक की पत्नी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से की चिकित्सक का पंजीकरण निरस्त करवाने की मांग


लखीमपुर-खीरी। साल 2015 में आई अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘गब्बर इज बैक’ का हीरो एक ऐसे निजी अस्पताल का पर्दाफाश करता है जो मरे हुए शख्स को अस्पताल में दाखिल करता है और इलाज के नाम पर परिवार से मोटी रकम मांगता है यह फिल्मी कहानी खीरी जिले के शहर मुख्यालय में सच होती दिखाई दी। 
यहा इलाज के नाम पर ठगी व मरे हुए शख्स को जिला अस्पताल रेफर करने का आरोप मृतक की पत्नी ने लगाया है। साथ ही लापरवाही करने वाले चिकित्सकों पर कार्यवाही व निजी अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करवाने की मांग भी की है। 
        पीड़िता खुश्बू मिश्रा ने जिला अधिकारी और सीएमओ को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि उसके पति नृपेन्द्र कुमार पुत्र पैकरमा प्रसाद निवासी ग्राम बेलहा दरियाना पोस्ट कनकारी थाना तम्बौर जनपद सीतापुर को लेकर लखीमपुर शहर स्थित गुप्ता हॉस्पिटल 24 जुलाई को पहुची थी, जहां उसी दिन रात 9 : 30 पर पीड़िता के पति का आपरेशन कर राड निकाली गई थी आपरेशन के पहले डाक्टर राधेश गुप्ता ने जांच करवाई थी उस समय पीड़िता के पति का शुगर लेवल 200 प्रतिशत था लेकिन डा. राधेश गुप्ता ने जानते हुये भी पति का आपरेशन पैसे के लालच में करके पति की जान खतरे में डाल दी थी। तभी से पति की हालत बिगड़ने लगी थी दिनांक 27 जुलाई 2024 की रात 12 बजे के बाद डा. राधेश गुप्ता ने मरीज की हालत नाजुक बताते हुये रेफर कर निजी एंबुलेंस से जिला अस्पताल ओयल भेजवा दिया। जिला अस्पताल में पहले दिन डा. अर्पित ने इलाज किया फिर दिनांक 29 जुलाई 2024 को जिला अस्पताल के डा. आशुतोष वर्मा को ट्रांसफर कर दिया गया डा. आशुतोष ने 29 जुलाई से 01 अगस्त 2024 तक इलाज किया और फिर बताया कि अगर सही इलाज चाहते हो तो चन्दरानी अस्पताल लखीमपुर-खीरी मे भर्ती कराओ वहा हम बैठते हैं पीड़िता डा. आशुतोष वर्मा के बहकावे में आकर चन्दरानी हास्पटिल में भर्ती करवाया एक हफ्ते तक डा आशुतोष वर्मा इलाज करते रहे हालांकि पीड़िता के पति कि हालत बिगड़ती गई और इलाज होता रहा लगभग एक लाख रुपए डा. आशुतोष वर्मा के द्वारा लिया गया और दिनांक 08 अगस्त   2024 को जब पीड़िता के पति की मौत हो गई तब भी नही बताया गया और स्वयं एंबुलेंस बुलाकर उसमें रखवा दिया और जिला अस्पताल ले जाने को कहा पीड़िता जिला अस्पताल लेकर गयी वहा उसको बताया गया कि उसके पति की मौत एक घण्टा पहले ही हो चुकी तब पीड़िता सन्न रह गई और अपने साथ हुई ठगी समझ पाई पीड़िता खुशबू मिश्रा ने बताया कि डा. आशुतोष वर्मा व डॉ. राधेश गुप्ता के द्वारा धन उगाही के लालच में पति की जान चली गई इन दोनों डाक्टरों के खिलाफ इलाज में लापरवाही कर जान लेने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्यवाही करते हुए इनके हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त करवाना न्याय हित में आवश्यक है।

क्या बोले मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ संतोष गुप्ता!

इस संबंध में बात करने पर सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने रटा रटाया जवाब दिया कि मामले की जांच करवाई जा रही है। दोषी पाए जाने पर कठोर कार्यवाही की जाएगी।

Related Articles

Comments

Back to Top