रामलला के लिए काव्य पाठ जीवन का ऐतिहासिक ही नहीं आध्यात्मिक क्षण भी

लखीमपुर खीरी , 126

 लखीमपुर खीरी । श्रीरामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ, यह हम सबके जीवन के लिए एक बहुत बड़ी घटना है, ये घटना ही नहीं पौराणिक क्षण है। उससे बड़ी बात यह है कि मैं लखीमपुर जिले से अकेला कार सेवक कवि हूं, जिसे भगवान श्रीराम जी की नगरी में ऐसे पावन समय पर काव्य पाठ का अवसर मिला। यह मेरे जीवन की बड़ी उपलब्धि है।
   जिले के ओजस्वी कवि अनिल शुक्ल 'अमल', जो पूरे देश में अपनी ओजस्वी कविताओं के लिए जाने जाते हैं,अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर बनने के बाद प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात् हुए कवि सम्मेलन में इस जिले से उन्हें भी काव्य पाठ के लिए निमंत्रण मिला था,भक्ति और ओजस्वी रचनाओं के लिए जाने जाने वाले अनिल अमल ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने के बाद वापस आने पर उन क्षणों को भी साझा किया।
  उन्होंने बताया कि श्री राम लला की भव्य प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में रोडवेज बस स्टैंड के सामने जो कवि सम्मेलन का जो विराट आयोजन कराया गया उसका आयोजन श्रीराम सांस्कृतिक संकुल की ओर से किया गया था। इसमें देश के जाने-माने कवि जैसे ओमपाल निडर फिरोजाबाद ,वेद व्रत बाजपेई लखनऊ, राजीव बटिया दिल्ली, भालचंद्र आजमगढ़ इत्यादि कवि आए थे। उसमें अनिल अमल को  प्रभु श्रीराम की जन्म भूमि के संघर्ष पर कविता पढ़नी थी, उस कविता का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि कविता की पंक्तियां कुछ ऐसी थी।
पांच सदी तक लड़े अनवरत लाखों हैं बलिदान दिए ,
कितनी पीढ़ी बीत गई हैं मंदिर का अरमान लिए,
राम लला हम आएंगे का नारा कभी दिया हमने, 
मंदिर भव्य बनाएंगे का वादा कभी किया हमने,
हर सनातनी का सीना गौरव से आज तन रहा है, 
राम लला की परम कृपा से मंदिर भव्य बन रहा है, 
मंदिर बनकर बना रहे अब वह उपाय करवाना है।
इसीलिए इस भारत भू को  हिंदू राष्ट्र बनाना है।

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