कलम का एक और सिपाही मौन, दो वर्ष की पीड़ा के बाद थम गई पत्रकार सैय्यद मुशीर की सांसें समय की मार से टूटा परिवार, नई बस्ती में पसरा शोक
लखीमपुर खीरी Sep 17, 2026 at 06:50 PM , 14लखीमपुर-खीरी। समय बड़ा निर्मम और बलशाली होता है। हंसता-खेलता परिवार कब शोक में डूब जाए कोई नहीं जानता। कुछ ऐसा ही हृदयविदारक दृश्य मोहल्ला नई बस्ती में देखने को मिला, जहां लेखनी के सिपाही, खबर प्रवाह के जिला संवाददाता सैय्यद मुशीर अंततः जीवन की लड़ाई हार गए। दो वर्ष तक बिस्तर पर तड़पने के बाद आज प्रातः 11 बजकर 45 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना से सम्पूर्ण जनपद के पत्रकार जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
बताया जाता है कि सैय्यद मुशीर ने वर्ष 2020 में पत्रकारिता के क्षेत्र में संवाददाता के रूप में प्रवेश किया था। अपनी परिश्रम और निष्ठा से उन्होंने शीघ्र ही जनपद में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और खबर प्रवाह के जिला संवाददाता बन गए। उन्होंने अपनी पत्नी शीरी जैदी को भी पत्रकारिता के क्षेत्र में उतारा, जो आज सुनहरा संसार और खबर प्रवाह का दायित्व संभाल रही हैं। किंतु नियति को कुछ और ही स्वीकार था।
दो वर्ष पूर्व एक भीषण दुर्घटना ने उनका सम्पूर्ण जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कमर और पैरों में ऐसी गंभीर चोट आई कि वह पुनः अपने पैरों पर खड़े न हो सके। तब से वह चारपाई पर पड़े जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर रहे थे। उपचार में जो संचित पूंजी थी सब समाप्त हो गई, यहां तक कि घर की सामग्री तक बेचनी पड़ी। अब न औषधि के लिए धन शेष है और न घर चलाने का कोई साधन, ऊपर से निर्धनता का पहाड़।
इस टूटे हुए परिवार का सम्पूर्ण भार उनकी पत्नी पत्रकार शीरी जैदी के कोमल कंधों पर आ गया। घर में एक अबोध बालक, सामने बिस्तर पर तड़पता पति और ऊपर से जीविका की चिंता। शीरी जैदी किस वेदना और यातना में अपने जीवन के दिन व्यतीत कर रही हैं, इसका अनुमान लगाना भी कठिन है। एक ओर पति की विवशता और दूसरी ओर बच्चे का पालन-पोषण, प्रत्येक दिन उनके लिए एक नई परीक्षा बन गया था।
इस शोकग्रस्त परिवार की स्थिति की सूचना पाकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव रेहान खान उनके घर पहुंचे थे। उन्होंने मुशीर की गंभीर स्थिति देखी और उनकी पत्नी शीरी जैदी को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने आश्वासन दिया था कि इस प्रकरण को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचाया जाएगा और आगे भी हर संभव सहायता दिलाई जाएगी।
आज वह मौन हो गया जो दूसरों की आवाज बनता था। अश्रुपूरित नेत्रों से पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगर के प्रबुद्धजनों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। उनका जाना पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।






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