*इक्कीस हजार छे सौ कंठों में एक साथ गूंजा वंदे मातरम्।*

लखीमपुर खीरी , 2

(सरस्वती विद्या मंदिर के प्रांगण में 1,700 लोगों ने एक स्वर में किया राष्ट्रगान-सदृश सामूहिक गायन, 41 विद्यालयों ने लिया हिस्सा
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर पलिया कला में दिखा राष्ट्रभक्ति और एकता का अद्भुत संगम)

पलिया कला, खीरी। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर चल रहे ‘नमामि भारतम्’ वंदे मातरम् सामूहिक गायन कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को प्रातः 11 बजे सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, पलिया कला के प्रांगण में भव्य सामूहिक वंदे मातरम् गायन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय परिसर में लगभग 1,700 लोगों ने एक साथ, एक लय और एक स्वर में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया। पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से ओत-प्रोत नजर आया। विद्यालय के भैया-बहन, आचार्य परिवार, विद्वत परिषद, पूर्व छात्र, मातृ भारती, अभिभावक तथा नगर के गणमान्य नागरिक इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने।
41 विद्यालयों में एक साथ गूंजा राष्ट्रगीत
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि सरस्वती विद्या मंदिर पलिया कला के माध्यम से नगर एवं पोषित ग्रामों के 41 विद्यालयों में कुल 21,600 कंठों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन किया।
एक साथ हजारों कंठों से निकली वंदे मातरम् की स्वर-लहरियों ने पूरे क्षेत्र में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता एवं भारतीय सांस्कृतिक गौरव के भाव को जागृत करना रहा।
वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, भारत की संघर्ष यात्रा का मूल मंत्र
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी रमन सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की 150 वर्षों की संघर्ष यात्रा और करोड़ों भारतीयों के त्याग एवं बलिदान से जुड़ा भाव है। उन्होंने वंदे मातरम् के मूल भाव को समझने के लिए बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के ‘आनंदमठ’ उपन्यास के अध्ययन को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता की अर्धरात्रि में 14-15 अगस्त 1947 को संविधान सभा में सुचेता कृपलानी ने वंदे मातरम् का गायन किया था। उन्होंने स्वतंत्रता के अवसर पर पंडित ओंकारनाथ ठाकुर द्वारा आकाशवाणी से वंदे मातरम् के गायन का भी उल्लेख किया।
भारत माता की शक्ति और वात्सल्य का अद्भुत वर्णन”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सलिल अग्रवाल, पलिया नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी, ने वंदे मातरम् की अंतिम पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें भारत माता के बाहुबल, शक्ति और वात्सल्य स्वरूप का अद्भुत चित्रण मिलता है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् में संतान द्वारा अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पण और नमन का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
राष्ट्रभक्ति से सराबोर रहा पूरा वातावरण
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में देशभक्ति का वातावरण बना रहा। हजारों कंठों से एक साथ उठी वंदे मातरम् की स्वर-लहरियों ने उपस्थित लोगों में उत्साह और गौरव का भाव भर दिया। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों और नई पीढ़ी को देश की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना रहा।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वाधीनता संग्राम की विरासत का मंत्र है, जो देशवासियों को एकता के सूत्र में पिरोने और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देने का कार्य करता है।
अतिथियों एवं सहभागियों का जताया आभार
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक शिवपाल सिंह ने कार्यक्रम में पधारे अतिथियों, विभिन्न अनुषांगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं, अभिभावकों, पूर्व छात्रों तथा सभी सहभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रबंध समिति, अभिभावक, पूर्व छात्र, भैया-बहन, आचार्य परिवार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
41 विद्यालय  21,600 कंठ  एक स्वर  एक संकल्प
वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने पर पलिया कला ने रचा सामूहिक गायन का यादगार अध्याय

Related Articles

Comments

Back to Top