18 से 20 लाख श्रद्धालु आने की संभावना मेला क्षेत्र को 365 सेक्टर में विभाजित किया- मेलाधिकारी गया

लखीमपुर खीरी , 1

(विश्वकांत त्रिपाठी)

गया लखीमपुर। गया परिक्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 2026 का शनिवार से  शुभारंभ हो चुका है, जिसमें अपने पूर्वजों (पितरों) के मोक्ष की कामना के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रहा है। 
      इस वर्ष यह मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहे इस मेले का आधिकारिक उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा किया गया।
अपने पूर्वजों के निमित्त गयाजी के प्रमुख स्थलों तथा वेदियों और विशेष परंपराओं की मुख्य झलकियाँ कहां होगा पिंड दान, इसकी शुरुआत त्रिवेणी संगम प्रयागराज, बनारस तथा पुन-पुन नदी के बाद 54 बेदियों पर योग्य आचार्यों द्वारा क्षेत्रिय पंडा महराज के निर्देशन में करायें जाने का प्राविधान है।

1. प्रेतशिला पर्वत पर सत्तू उड़ाने की अनूठी परंपरा महत्व: गयाजी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित प्रेतशिला पर्वत पर अकाल मृत्यु का शिकार हुए पितरों की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है,परंपरा: इस 1000 फीट ऊंचे पर्वत की चोटी पर बने प्रेतशिला वेदी और ब्रह्मसरोवर पर श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त सत्तू उड़ाते हैं, मान्यता है कि सत्तू उड़ाने (उड़ाना आस्था) से प्रेतयोनि से पितरों को मुक्ति मिलती है।
2. प्रमुख पिंड वेदियाँ और आस्था का केंद्र विष्णुपद मंदिर: भगवान विष्णु के चरण चिह्नों पर स्थित इस प्रमुख मंदिर और देवघाट पर हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु तर्पण कर रहे हैं। फल्गु नदी: विष्णुपद के समीप बहने वाली पवित्र फल्गु नदी में स्नान और जल तर्पण का विशेष विधान है। अक्षयवट: पिंडदान के अंतिम दिन अक्षयवट वेदी पर पितरों की अक्षय तृप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
3. प्रशासन द्वारा की गई आधुनिक व्यवस्थाएँ
इस बार गया प्रशासन ने लगभग 16 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए पूरे मेला क्षेत्र को 365 सेक्टरों में विभाजित किया है: टेंट सिटी: गांधी मैदान और अन्य स्थलों पर श्रद्धालुओं के रुकने के लिए विशाल मुफ्त टेंट सिटी बनाई गई है।हाई-टेक सुरक्षा व सुविधा: भीड़ नियंत्रण के लिए AI तकनीक, अनुवाद के लिए एआई गूगल ट्रांसलेटर और बिछड़े लोगों को मिलाने के लिए क्यूआर कोड-सक्षम (QR code-enabled) रिस्टबैंड की सुविधा शुरू की गई है।पिंडदान गयाजी ऐप: श्रद्धालुओं की सहायता के लिए प्रशासन ने एक समर्पित मोबाइल ऐप और गया जिला प्रशासन की वेबसाइट भी जारी की है।
    यदि आप भी गयाजी की यात्रा पर हैं,अथवा, योजना बना रहे हैं, तो बताएं कि क्या आप पिंडदान की संपूर्ण विधि, यातायात रूट या ठहरने के प्रबंध के बारे में अधिक जानकारी जानना चाहते लेकर ही यात्रा करें,अथवा अपने क्षेत्र के पंडा महराज से सम्पर्क स्थापित करे।
  पितृपक्ष 2026: 1000 फीट ऊंचे पर्वत पर सत्तू उड़ानों की अनोखी परंपरा, अकाल ...
एक नजर में स्थान : गयाजी से करीब 10 किमी दूर प्रेतशिला पर्वत मुख्य केंद्र : प्रेतशिला वेदी और ब्रह्मसरोवर,विशेष मान्यता : अकाल मृत्यु वाले पितरों के लिए ...

 गयाजी में 15 दिवसीय विश्वप्रसिद्ध ...
 गयाजी में 15 दिवसीय विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेला विष्णुपद देवघाट पर उमड़ी पिंडदानियों की भारी भीड
16 लाख पिंडदानियों के लिए गयाजी तैयार, श्रद्धालुओं की सुविधा, बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेले को लेकर सभी तैयारी पूरी हो चुकी है। मेला को 365 सेक्टर में विभाजित कर दिया 

गयाजी पितृपक्ष मेला 2026: घर बैठे एक क्लिक में मिलेगी पिंडदान की सभी जानकारी गयाजी पितृपक्ष मेला 2026 के लिए एआई गूगल ट्रांसलेटर, वेबसाइट और 'पिंडदान गयाजी' मोबाइल ऐप की शुरुआत की गई है। gaya ji pitrupaksha mela 2026.

गयाजी में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 का शुभारंभ हो गया है ...
गयाजी में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 का शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मेले का उद्घाटन किया। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाले गया जी‌ मेले में पिंडदान को हिंदू धर्म में पितरों के निमित्त किए जाने वाले प्रमुख श्राद्ध कर्मों में माना जाता है। खासकर पितृपक्ष के दौरान देश के देश विदेश के असंख्य सनातन धर्मावलंबियो का महासंगम यहां देखने को मिल रहा है।

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