*बाढ़ का रुख़ पलिया की ओर करने के पीछे बड़ी साज़िश, अच्छे खासे शहर को बर्बाद करने की योजना।*
लखीमपुर खीरी Sep 16, 2026 at 06:32 PM , 2पलियाकलां-(खीरी) पलिया विधानसभा में बाढ़ ने इस कदर कहर बरपाया है कि गांवों से लेकर शहर और जंगल खेत खलिहान तथा दुकानदार हर साल बर्बाद हो रहें हैं लेकिन पलिया क्षेत्र के लोगों का दिल बहोत बड़ा है हर बार साजिशकर्ताओं को माफ कर घुट घुट कर जिंदगी जी रहे हैं एक ओर जहां तेज बरसात में क्षेत्र ताल में बदल जाता है और उसकी बडी वजह बाहर से आकर लोगों ने ताल तलैया पर कब्जा कर जल श्रोतों को पाटकर कब्जा कर लिया जिसके कारण पानी सड़कों और निचले इलाकों में भरने लग जाता है।
*भारी बारिश, और नदियों का रौद्र रूप।*
एक वह दिन भी थे जब इस क्षेत्र में कभी बाढ़ का नाम नहीं सुना जाता था लेकिन आज वह दिन आ गए जब बाढ़ से लोग बर्बाद होकर
पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं से इस क्षेत्र करीब 15 सालों से बाढ़ का कहर झेलते झेलते आम जनता घर खेत व्यापार और किसानी सभी चौपट हो गई यही नहीं जो क्षेत्र कल तक गुलजार हुआ करता था वह आज वीरानी के कगार पर पहुंच गई आखिर इसका जिम्मेदार कौन है।
क्या ऊंचे ऊंचे पदों पर बैठे लोग और स्थानीय विभागों में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को यह क्षेत्र बर्बाद होते नहीं दिखाई दे रहा है और अगर हो ही रहा है तो क्या इसके लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है यह अपने में बड़ा सवाल है।
*रेल बंद सड़कें बंद बंद हुआ व्यापार, आंखों पर पट्टी बांधे बैठी सरकार।*
भारत नेपाल बॉर्डर के तराई में बसा सबसे सुंदर और पर्यटन स्थल कहे जाने वाला पलिया कलां अब वह बाढ़ की गम्भीर बिमारी से जूझ रहा है।
कल तक जहां बड़े-बड़े दावे करने वाले वन मंत्री व पर्यटन मंत्री विकास की नदियां बहा रहे थे आज उसी जगह पर बर्बादी की लहर बनी हुई है।
वही लखीमपुर क्षेत्र के तमाम मंत्री और नेता और बड़े-बड़े सरकारी पदों पर बैठकर दावे करने वाले नौकरशाह क्षेत्र के विकास की डुगडुगी बजा रहे थे लेकिन आज रेल बंद और पलिया की बर्बादी पर आखे बंद कर बैठे हुए है।
*कल तक जो पलिया शहर जिला बनने की कगार पर था आज अपनी ही बर्बादी पर रो रहा है।*
पलिया जिला मंच से लेकर तमाम जनता की पुकारने पलिया को जिला बनाने के लिए काफी ज्यादा जहर करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास तक इस क्षेत्र की समस्याओं को अवगत कराते हुए जल्द से जल्द जिला बनाने की बात रखी गई थी लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने इस क्षेत्र को बर्बादी की तरफ धकेल कर सब कुछ खत्म कर दिया।
*सड़के बंद संपर्क टूटता, रेल बंद कई गांव शहर अंधकारों में डूबते।*
कई नदियों के रखरखाव की घोर लापरवाही के कारण हर वर्ष पलिया कलां के क्षेत्र में बाढ़ के तबाही का कारण बनती है और इसी बीच सड़के बंद होने से आवागमन में भारी दिक्कत तो होती ही है कई देश व राज्यों से संपर्क भी टूट जाता है।
वही एकमात्र रेलवे की छोटी लाइन की सुविधा बदहाल या फिर बंद होती है इससे हजारों गांव का संपर्क टूट जाता है और कई शहरों में अंधकार छा जाता है। इस क्षेत्र में सबसे बड़ी और कई शहर गांव को जोड़ने वाली एकमात्र रेलवे की सुविधा है जो जंगल घाटों को पार करते हुए छोटे-बड़े शहरों को जोड़ती है यहां तक की दुधवा नेशनल पार्क वन क्षेत्र में आने वाली सैकड़ो सड़कें बाधित या बंद के लिए कोर्ट के आदेश दिखाकर बंद किया जाता है जो आम जन की हालत और बद से बत्तर हो गई है। अब देखना होगा कि क्या आने वाले चुनाव से पहले इस क्षेत्र को कोई बड़ी उपलब्धियां हासिल होगी या फिर जनता के आक्रोश का तमाम राजनीतिक दलों को सामना करना पड़ सकेगा।






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