जन्म के तुरंत बाद एक घंटे में मां का दूध शिशु के लिए अमृत :- डॉ अमित बाजपेई

लखीमपुर खीरी , 27

मां का पहला दूध बना शिशु का ‘प्राकृतिक टीका! फरधान सीएचसी में स्तनपान को लेकर जागरूक हुईं महिलाएं


लखीमपुर-खीरी। मां का दूध नवजात के लिए सिर्फ आहार नहीं, बल्कि उसकी मजबूत नींव है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विश्व स्तनपान दिवस पर फरधान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को स्तनपान के महत्व, फायदे और सही तरीके की जानकारी दी गई।


छह महीने तक सिर्फ स्तनपान की दी गई सलाह!

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का सीएचसी अधीक्षक डॉ अमित बाजपेई ने किया कार्यक्रम में महिलाओं को बताया गया कि बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती छह महीने तक केवल स्तनपान कराना शिशु के बेहतर विकास के लिए बेहद जरूरी है। इससे बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।

पहला पीला दूध बच्चे के लिए अमृत समान!


सीएचसी अधीक्षक डॉ अमित बाजपेई ने महिलाओं को जागरूक करते हुए बताया कि जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध जरूर पिलाना चाहिए। इस दूध को कोलोस्ट्रम कहा जाता है। उन्होंने बताया कि कोलोस्ट्रम शिशु के लिए पहले प्राकृतिक टीके की तरह काम करता है, जो उसे कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

स्तनपान से कम होता है कुपोषण का खतरा!

सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमित बाजपेई ने कहा कि स्तनपान शिशु को कुपोषण से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। मां का दूध बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे उपयुक्त आहार है। उन्होंने कहा कि नियमित स्तनपान से बच्चों का विकास बेहतर होता है और उनमें संक्रमण से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है।


जन्म के 1 घंटे के अंदर जरूर पिलाएं मां का दूध!


सीएचसी अधीक्षक डॉ अमित बाजपेई ने बताया कि जन्म के एक घंटे के भीतर मां के पीले गाढ़े दूध में कई प्रकार के पोषक तत्व होते हैं। यह दूध बच्चों में शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।


भ्रांतियों से बचने की दी गई सलाह!

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को स्तनपान से जुड़ी गलत धारणाओं और भ्रांतियों से दूर रहने की सलाह दी गई। स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि किसी भी तरह की समस्या होने पर महिलाएं घरेलू उपायों में समय न गंवाएं और तुरंत चिकित्सक से सलाह लें, ताकि मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

स्वस्थ समाज के लिए जरूरी है जागरूकता!

कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि स्तनपान को लेकर जागरूकता बढ़ाने से शिशु मृत्यु दर और कुपोषण जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे, ताकि हर मां अपने बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य दे सके।
कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरधान के सभी स्वास्थ्य कर्मी, स्टाफ नर्स
 रोजलीना स्टेनले 
 कनक तिवारी, एएनएम, आशा कार्यकर्ता सहित बड़ी संख्या में लाभुक उपस्थित रहे। सभी ने नवजात शिशु के लिए मां के दूध को अमृत समान बताते हुए इसके प्रति जागरूकता फैलाने का वचन लिया।

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