गोला पुलिस की लापरवाही: एक माह बाद भी नहीं मिली नाबालिग

लखीमपुर खीरी , 30

लगातार सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डाल रहा आरोपी  

खबर का हुआ असर एसपी ने लिया संज्ञान, जांच सीओ गोला को सौंपी  

(सुनहरा)

 लखीमपुर-खीरी। कहते हैं पुलिस किसी भी मामले को गंभीरता से नहीं लेती लेकिन जब मामला मीडिया में पहुंचता खबरे टुविट होती तो पुलिस कुंभकर्णीय नीद से जागती उदाहरण गोला क्षेत्र की वृद्धा की 15 वर्ष की पोती को  एक माह पहले कॉलोनी के ही एक युवक  बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। उसके लखीमपुर में रह रही महिला की बेटी के घर से पोती ने रखे तीन मोबाइल भी ले गयी महिला का कहना है कि एक जुलाई को गोला थाने में तहरीर दी गई थी, लेकिन पुलिस ने 22 दिन बाद 22 जुलाई को एफआईआर दर्ज की। मामले की विवेचना एक उपनिरीक्षक कर रहे हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस नाबालिग की तलाश की बजाय लखीमपुर में दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाली महिला की बेटी को लगातार परेशान कर रही है। उसे बार-बार गोला कोतवाली बुलाया जा रहा है और आधार कार्ड की मांग की जा रही है। आरोप है कि किश्त पर लिया गया एक मोबाइल भी नाबालिग के पास है। परिवार ने आईजीआरएस पर शिकायत की थी कि आरोपी सोशल मीडिया पर नाबालिग के साथ लगातार आपत्तिजनक पोस्ट डाल रहा है जिसको लेकर पीड़िता की बेटी ने जन एक्सप्रेस कार्यालय में जिला प्रभारी से न्याय की गुहार लगाई पीड़िता की बेटी की पीड़ा देख खबर प्रकाशित की गई और पीड़िता की बेटी द्वारा की गई आन लाइन शिकायत पर खबर प्रकाशित की गयी इसके बाद महिला की बेटी पर दबाव बनाकर शिकायत वापस लेने और टुविट  हटाने को कहा गया। लगातार प्रताड़ना के कारण महिला की बेटी की तबीयत भी बिगड़ गई है।
उधर आरोपी ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालकर पूरे परिवार की सामाजिक छवि खराब कर रहा है। पुलिस की सुस्ती और लापरवाही के कारण नाबालिग अब तक बरामद नहीं हो सकी है। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने संज्ञान लिया है और पूरे प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी गोला को सौंपी है। पीड़ित परिवार ने एसपी से मांग की है कि नाबालिग को तत्काल बरामद किया जाए, आरोपी से छीने गए तीनों मोबाइल वापस दिलाए जाएं, बेटी को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और आरोपी व उसके परिजनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
उधर पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और नाबालिग की तलाश के प्रयास किए जा रहे हैं। तहरीर के 22 दिन बाद एफआईआर दर्ज होने और एक माह में बरामदगी न होने को लेकर लखीमपुर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। अब सीओ गोला की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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