सरस्वती शिशु वाटिका में गुरु पूर्णिमा का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया

लखीमपुर खीरी , 28

लखीमपुर खीरी।विद्या भारती विद्यालय, सनातन धर्म सरस्वती शिशु वाटिका एवं मंदिर में मंगलवार को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती जी एवं महर्षि वेदव्यास जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती हीरा सिंह ने गुरु पूर्णिमा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। उन्होंने चारों वेदों का विभाजन किया, महाभारत की रचना की तथा 18 पुराणों का संकलन किया। उनके इसी महान योगदान के कारण उन्हें 'आदि गुरु' कहा जाता है और उनके सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है।गुरु का जीवन में महत्वविद्यालय के आचार्य श्रीमान अम्बुज ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास ने कठिन वेदों को सरल रूप में प्रस्तुत कर मानव समाज का मार्गदर्शन किया। गुरु केवल विद्यालय के शिक्षक ही नहीं होते, बल्कि माता-पिता एवं जीवन में सही मार्ग दिखाने वाला हर व्यक्ति गुरु तुल्य है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्या ने बच्चों को महर्षि वेदव्यास एवं भगवान गणेश जी की प्रेरक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि समर्पण और परस्पर सम्मान के भाव से मात्र 2 वर्ष 6 महीने में महाभारत के 1 लाख श्लोकों की रचना कैसे पूर्ण हुई।कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के उच्चारण के साथ हुआ।इस दौरान विद्यालय का समस्त शिक्षक परिवार उपस्थित रहा।"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।

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