*शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नन्द जी की 81दिवसीय यात्रा का गोरखपुर में हुआ समापन*

लखीमपुर खीरी , 35

(विश्वकांत त्रिपाठी/केके शुक्ला) 

 लखीमपुर खीरी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की 81 दिनों और 1,920 घंटों के इस अविरल प्रवास में उत्तर प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीमा को स्पर्श करते हुए लगभग 14,630 किलोमीटर का मार्ग तय किया गया।

"*उत्तर प्रदेश की पुण्यधरा पर संस्कृति, धर्म और जन-आस्था की संवाहिका गोमाता की गरिमा की पुनर्स्थापना हेतु आयोजित 'गविष्ठि यात्रा' का सफल समापन हुआ है। गत 3 मई को गोरखपुर से प्रारंभ होकर निरंतर 81 दिनों तक संचालित इस ऐतिहासिक प्रवास के उपरांत गोरखपुर पहुंचने पर प्राप्त जन-भावनाओं और तथ्यों को आपके समक्ष प्रस्तुत करते हुए हम अत्यंत हर्ष एवं दायित्व का अनुभव कर रहे हैं।*
*यह यात्रा केवल एक अभियान नहीं, अपितु संपूर्ण उत्तर प्रदेश के जन-जन के हृदय की वेदना और संकल्प का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण थी। यात्रा के मुख्य आंकड़े निम्नवत् हैं:*
•कुल आच्छादित विधानसभा क्षेत्र: 403 (शत-प्रतिशत)
• कुल वाहन काफिला: 11 गाड़ियाँ
• ⁠कुल सहयात्री 108 (औसतन) 
• कुल तय दूरी: 14,630 किलोमीटर
• आयोजित जन-सभाएँ: 2,403 सभाएँ*
• *प्रत्यक्ष जन-संवाद: 81 दिनों और 1,920 घंटों के इस अविरल प्रवास में उत्तर प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीमा को स्पर्श करते हुए 14,630 किलोमीटर का मार्ग तय किया गया। इस दौरान आयोजित 2,403 सभाओं के माध्यम से 18 लाख से अधिक लोगों से सीधा संवाद हुआ। सोश्यल मीडिया, समचार पत्रों, न्यूज़ चैनलों के द्वारा लगभग 27 करोड़ लोगो ने अपने को जोड़ा अर्थात् शंकराचार्य जी की गविष्ठी यात्रा को देखा - सुना और समझा।*
 विशेषरूप से मुस्लिम समुदाय द्वारा गोमाता को राज्यमाता / राष्ट्रमाता बनाने हेतु 81 ज्ञापन-एवं समर्थन पत्र प्राप्त हुए ; जिसमें प्रमुख रूप से मुस्लिम पर्सनल लो बोर्ड , इमरान मसूद (सांसद) , फहीम इरफ़ान (विधायक, बिल्लारी), काज़ी नौमान मसूद ( अध्यक्ष, नगर निगम गंगोह) , ओल उम्मत फाउंडेशन, मुस्लिम युवा समाज , प्रबंध समिति ईदगाह, मैनेजिंग कमेटी जामा मस्जिद भी शामिल है l 
यात्रा  के दौरान जनता द्वारा 396 गोमाता की प्रतिमा / स्मृति चिह्न, 3123 तस्वीरे, 1827 शाल-दुपट्टे, 18 तलवारें भेट स्वरूप प्राप्त हुई ।
सम्पूर्ण यात्रा के दौरान अनेकों पार्टियो-दलों- समाजिक संगठनों सहित सनातनी-हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, जैन, कबीर पंथ सहित अनेक मतानुयायियों ने शंकराचार्य जी की गविष्ठी यात्रा का स्वागत किया गोमाता को राज्य और राष्ट्रमाता बनाये जाने के समर्थन में शंकराचार्य जी की यात्रा में सम्मिलित हुए"* l

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