बेल्जियम यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए हुआ हर्षित मिश्र का चयन

लखीमपुर खीरी , 0

धौरहरा खीरी।
कस्बा निवासी उमाशंकर मिश्र के पुत्र हर्षित मिश्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। हर्षित का चयन बेल्जियम की प्रतिष्ठित घेंट यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए हुआ है। वे महावीर जैन के उपदेशों के संकलन से संबंधित प्राकृत भाषा के महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘प्रश्नव्याकरण सूत्र’ के व्याकरणिक विश्लेषण पर शोध करेंगे। बताया गया है कि इस विषय पर किया जाने वाला यह अपनी तरह का प्रथम शोध कार्य होगा।
परिजनों के मुताबिक हर्षित ने प्राथमिक शिक्षा से लेकर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई धौरहरा कस्बे में पूरी की।इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की।बचपन से ही भारतीय संस्कृति और प्राचीन भाषाओं के प्रति उनकी विशेष रुचि रही।इसी रुचि के चलते उन्होंने प्राचीन भारतीय भाषा प्राकृत के अध्ययन को अपने शोध का क्षेत्र बनाया।वर्ष 2023-24 में हर्षित को पुणे स्थित इंटरनेशनल स्कूल फॉर जैन स्टडीज (ISJS) की ओर से भगवान महावीर प्राकृत फेलोशिप प्रदान की गई। इसी दौरान वे संस्थान द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मकालीन पाठशाला के लिए भी चयनित हुए। उनकी प्रतिभा अध्ययनशीलता और शोध के प्रति समर्पण को देखते हुए सितंबर 2024 में ISJS ने उन्हें रिसर्च एसोसिएट नियुक्त किया।रिसर्च एसोसिएट के रूप में हर्षित भारतीय और विदेशी विद्वानों को प्राकृत एवं अपभ्रंश भाषा का प्रशिक्षण देने के साथ ही संस्थान की विभिन्न शोध परियोजनाओं में भी योगदान दे रहे हैं। प्राकृत भाषा और भारतीय संस्कृति के क्षेत्र में उनके लगातार किए जा रहे अध्ययन ने अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय शोध के मंच तक पहुंचाया है।घेंट यूनिवर्सिटी में होने वाले उनके शोध का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर एवं भारतीय भाषा-संस्कृति की विदुषी प्रो.एवा डी.क्लार्क करेंगी। वहीं शोध के लिए इंटरनेशनल स्कूल फॉर जैन स्टडीज के निदेशक डॉ.श्रीनेत्र पाण्डेय तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो.ओमनाथ बिमली को सह-निर्देशक नियुक्त किया गया है।हर्षित की इस उपलब्धि से उनके परिवार के साथ ही धौरहरा क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है।स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे से क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में भारतीय प्राचीन भाषा एवं संस्कृति पर शोध के लिए चयनित होना युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि है।हर्षित का चयन न केवल उनके परिश्रम और प्रतिभा का प्रमाण है,बल्कि इससे धौरहरा का नाम भी अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक पटल पर पहुंचा है।

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