दहेज के लिए पत्नी को जिंदा जलाया, 10 साल की सजा

लखीमपुर खीरी , 21

पॉक्सो कोर्ट ने खीरी के दीपू को सुनाई कठोर सजा, 2000 रुपये जुर्माना भी

लखीमपुर खीरी। दहेज की मांग पूरी न होने पर पत्नी को जिंदा जलाने के मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 12 ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधीश वीरेंद्र नाथ पाण्डेय ने सरकार बनाम दीपू मामले में अभियुक्त को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष कठोर कारावास और 2000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

यह मामला थाना ईसानगर क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार वादी दिनेश कुमार की बहन की शादी वर्ष 2013 में ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम गुरुपुरवा मजरा खंडवा मीतमऊ निवासी दीपू पुत्र बुधई के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करने लगा।

अभियोजन पक्ष ने बताया कि 23 अप्रैल 2017 को आरोपियों ने मृतका पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। अगले दिन मायके वालों को सूचना मिली कि उनकी बेटी को खमरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो वहां बेटी का जला हुआ शव पड़ा मिला। इस पर वादी ने ईसानगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक बृजेश कुमार पाण्डेय ने कुल 7 गवाह पेश किए। इनमें वादी दिनेश कुमार, मृतका की बहन पिंकी, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर राजकुमार, गवाह इतवारी, विवेचक सेवानिवृत्त डिप्टी एसपी निर्मल कुमार बिष्ट और हेड कांस्टेबल बबलू कुमार के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए। इसके साथ ही 13 दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत किए गए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने धारा 498ए, 304बी, वैकल्पिक धारा 302 आईपीसी और 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दीपू को दोषी पाया। कोर्ट ने उसे 10 वर्ष की कठोर सजा के साथ 2000 रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया।

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