कर्मसु वेदवेदांग गुरुकुल विद्यापीठ में वैदिक रीति-रिवाज से सम्पन्न हुआ बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार, वेदाध्ययन का हुआ शुभारंभ

लखीमपुर खीरी , 55

गोला गोकर्णनाथ। कर्मसु वेदवेदांग गुरुकुल विद्यापीठ में आज वैदिक परंपरा के अनुसार बटुकों का यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार अत्यंत श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य बटुकों ने यज्ञोपवीत धारण कर ब्रह्मचर्य जीवन का संकल्प लिया। संस्कार सम्पन्न होने के पश्चात गुरुकुल में अध्ययनरत बटुकों के वेदाध्ययन का भी विधिवत शुभारंभ हुआ।

गुरुकुल के संस्थापक एवं आचार्य रामदेव मिश्र शास्त्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञोपवीत संस्कार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन, संयम और आत्मविकास की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि वैदिक परंपरा के अनुसार बिना यज्ञोपवीत संस्कार के वेदों का अध्ययन प्रारंभ नहीं कराया जाता। अब तक गुरुकुल के सभी बटुक संस्कृत भाषा, श्लोक, स्तोत्र, सूक्त एवं अन्य वैदिक मंत्रों का अध्ययन कर रहे थे, लेकिन आज इस संस्कार के उपरांत वे विधिवत ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद के अध्ययन के अधिकारी बन गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि गुरुकुल का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे संस्कारित, चरित्रवान एवं राष्ट्रनिष्ठ युवाओं का निर्माण करना है जो भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और वैदिक ज्ञान को आगे बढ़ाने का कार्य करें। आज के समय में वैदिक गुरुकुलों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, क्योंकि यही संस्थान हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।

संस्कार के उपरांत श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे गुरुकुल परिसर में भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला 'रिंकू', मीनाक्षी अग्रवाल, अतुल अग्रवाल, रामदयाल गुप्ता, रामू मिश्र, अमरनाथ मिश्र सहित अनेक गणमान्य नागरिक, अभिभावक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने गुरुकुल द्वारा वैदिक शिक्षा एवं भारतीय संस्कारों के संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायी पहल बताया।

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