SSB ने फुसला कर गुड़गांव ले जाई जा रही नेपाली युवतियों को मुक्त करा परिजनों को सौंपा
लखीमपुर खीरी Jun 16, 2026 at 07:13 PM , 19पलिया कलां लखीमपुर खीरी।भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी रोकने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के अभियान के तहत एसएसबी (SSB) की टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है।
बॉर्डर पर तैनात एसएसबी की एएचटीयू (AHTU) टीम ने जंगल के रास्ते छिपकर भारत में दाखिल हो रहीं दो नेपाली युवतियों को रोककर पूछताछ की, तो एक बड़े सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ।
दोनों युवतियों को बहला-फुसलाकर काम दिलाने के बहाने गुड़गांव ले जाया जा रहा था। एसएसबी ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों को रेस्क्यू कर लिया।
जानकारी के अनुसार, खुफिया विभाग से एसएसबी के समवाय प्रभारी को दोपहर करीब 2:10 बजे एक सटीक सूचना मिली कि दो नेपाली युवतियां जंगल के रास्ते अवैध रूप से सीमा पार कर भारत भागने की फिराक में हैं। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए समवाय प्रभारी ने एसएसबी की एएचटीयू टीम और अन्य जवानों को अलर्ट कर दिया। शाम करीब 7:25 बजे गौरीफंटा फॉरेस्ट चौकी के पीछे जंगल के रास्ते दो नेपाली युवतियों को संदिग्ध अवस्था में आते देख टीम ने उन्हें रोक लिया।
जब सुरक्षाकर्मियों ने दोनों से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि वे भारत के गुड़गांव शहर जा रही हैं। पकड़ी गई युवतियों में एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की है, जो नेपाल के धनगढी उपमहानगर पालिका (सुदूर पश्चिम प्रदेश) की रहने वाली है। नाबालिग ने खुलासा किया कि नेपाल के ही कैलाली जिला अंतर्गत धनगढी वार्ड नंबर 1 का रहने वाला सूरज कार्की नाम का व्यक्ति गुड़गांव में एक होटल चलाता है। उसने उसे बहला-फुसलाकर मिलने के लिए अपने होटल बुलाया था, जिसके झांसे में आकर वह घर से बिना बताए भाग आई थी।
एसएसबी की टीम ने जब नाबालिग की मां से फोन पर संपर्क किया, तो उन्होंने रोते हुए बताया कि उनकी बेटी पिछले दो दिनों से घर से लापता है और उसे वहीं रोक लिया जाए। वहीं, दूसरी युवती (उम्र करीब 19 वर्ष) भी नेपाल के कैलाली जिले की रहने वाली है। उसके पास भी भारत आने का कोई वैध दस्तावेज नहीं था और उसने बताया कि वह भी गुड़गांव के एक होटल में काम करने जा रही थी। उसकी मां से भी जब फोन पर बात की गई, तो उन्होंने भी बेटी के बिना बताए घर से भागने की बात कही। एसएसबी टीम ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों युवतियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर उनके परिजनों और संबंधित संस्था के सुपुर्द कर दिया है।































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