मझगई में खेत से महिला को दबोच ले गया बाघ, जंगल में मिला अधखाया शव
लखीमपुर खीरी Jun 16, 2026 at 06:53 PM , 19अफसरों की मीटिंग में बाघ कागज पर भागा, गांव में बाघ ने एक और जान ले ली”
लखीमपुर-खीरी। मझगई थाना क्षेत्र के खेतों में मंगलवार दोपहर मौत नंगी आंखों से देखी गई। खेत में काम कर रही महिला को बाघ गर्दन से दबोच कर खेतों में घसीट ले गया। सिर का आधा हिस्सा, कान और एक आंख को नोच डाला। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग लाठी-डंडे लेकर बाघ के पीछे दौड़े, लेकिन आदमखोर बाघ महिला को घसीटते हुए झाड़ी में गायब हो गया।
करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद पचास मीटर दूर जंगल में अधखाया शव पड़ा मिला। खून से सनी मिट्टी, बिखरे बाल और टूटी हंसिया चीख-चीख कर दर्द बयान कर रहे थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पूरा मामला मझगई थाना क्षेत्र का है।
यह चौबीस घंटे में बाघ के हमले की दूसरी वारदात है। इससे पहले रामनगर कलां गांव में किसान रामदीन को बाघ ने मार डाला था। तब गुस्साए ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर घंटों प्रदर्शन किया था। पुलिस के आश्वासन के सत्रह घंटे बाद शव पोस्टमॉर्टम के लिए उठ सका था।
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जिस वक्त महिला को बाघ चीर रहा था, उसी दिन वन विभाग मुख्यालय में बड़े अफसरों की मीटिंग चल रही थी। एसी कमरों में बैठकर बाघ से निपटने की रणनीति पर चर्चा हो रही थी। मगर गांव में एक मां की सांस उखड़ गई और कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। कागज पर योजनाएं बनती रहीं, खेतों में लाशें गिरती रहीं।
गांव में खौफ का माहौल है। खेत जाना अब मौत को दावत देना हो गया है। बच्चे स्कूल नहीं जा रहे। शाम होते ही पूरा इलाका सन्नाटे में डूब जाता है। वन विभाग हर बार पिंजरा लगाने और गश्त बढ़ाने का वादा करता है, मगर पिंजरे खाली पड़े हैं और कब्रें भरती जा रही हैं।
ग्रामीणों का गुस्सा अब बेकाबू है। लोगों का साफ कहना है कि जब तक आदमखोर बाघ पकड़ा नहीं जाता, जंगल की सीमा पर कैमरा ट्रैप नहीं लगते, हर संवेदनशील गांव में स्थाई वन टीम नहीं बैठती, तब तक खेत में काम करने वाली हर महिला की गर्दन पर बाघ का साया मंडराता रहेगा।
अब सीधा सवाल है कि मीटिंग में बैठे अफसरों की कुर्सी बचेगी या गांव वालों की जान। वन विभाग तुरंत जवाब दे कि बैठक में क्या तय हुआ और जमीन पर कब उतरेगा। मृतक के परिवार को पचास लाख का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और गांव में तत्काल वन चौकी दी जाए।
वरना अगली लाश के साथ पूरा इलाका सड़क पर होगा और जिम्मेदार अफसरों की कुर्सी हिलना तय































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