मोहम्मदी में घर में घुसकर विधवा और नाबालिग बेटी को पीटा, कपड़े फाड़कर लज्जा भंग की

लखीमपुर खीरी , 8

सभासद पर छेड़छाड़ का आरोप, पुलिस बोली- नाम हटाओ तभी FIR लिखेंगे


मोहम्मदी-खीरी 15 जून।
मोहम्मदी कस्बे के मोहल्ला सरैयां में दबंगई का नंगा नाच सामने आया है। एक विधवा और उसकी नाबालिग बेटी को घर में घुसकर लाठी-डंडों से पीटा गया। नाबालिग के कपड़े फाड़कर लज्जा भंग की गई। आरोप मोहल्ले के सभासद और उसके बेटे समेत सात लोगों पर है। शर्मनाक बात यह है कि थाने के दरवाजे पर सात दिन से पीड़िता खड़ी है, मगर पुलिस FIR लिखने को तैयार नहीं। साफ कहा जा रहा है कि सभासद और उसके बेटे का नाम हटाओ, छेड़छाड़ का आरोप हटाओ, तभी मुकदमा लिखेंगे।
घटना एक जून की शाम करीब साढ़े सात बजे की है। सलमा बेगम पत्नी स्वर्गीय शफी अहमद के घर के सामने दो बच्चे खेलते-खेलते झगड़ पड़े। बीच-बचाव करने गई सलमा पर पड़ोसी रिजवान, अनीस, नन्हा, फुरकान और अब्बन टूट पड़े। गाली-गलौज करते हुए घर में घुस आए और लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा। घर पर ईंट-पत्थर बरसाए गए। बच्चों के कपड़े तक फाड़ दिए गए। सलमा घर पर अकेली थी। किसी ने 112 पर सूचना दी तो पुलिस ने घायल सलमा को 108 एम्बुलेंस से सीएचसी मोहम्मदी भेजा।
2 जून को सलमा की सत्रह साल की नाबालिग बेटी महर हरिद्वार से घर लौटी। मामला शांत कराने के लिए आरोपियों से बात करने गई तो मोहल्ले के सभासद असफाक मंसूरी अपने बेटे के साथ पहुंच गए। दोनों ने मां-बेटी को भद्दी गालियां दीं। विरोध करने पर असफाक, उसका बेटा और बाकी आरोपी महिलाओं सहित घर में घुस आए और फिर से ईंट-पत्थर चलाने लगे।जब नाबालिग महर ने विरोध किया तो असफाक और उसके बेटे ने उसे जमीन पर पटक दिया। कपड़े फाड़ दिए। अश्लील हरकत की और लज्जा भंग की। धमकी दी कि पुलिस के पास गई तो जान से मार देंगे।पीड़िता 2 जून से लगातार थाना मोहम्मदी के चक्कर काट रही है। नौ जून तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। थाने पर खुलेआम कहा जा रहा है कि सभासद और उसके बेटे का नाम तथा छेड़छाड़ का आरोप हटाओ तभी FIR लिखेंगे। आरोप है कि असफाक मंसूरी आपराधिक प्रवृत्ति का दबंग है और पुलिस उसके दबाव में है।
पीड़िता ने 6 जून को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या 40015326027827 भी दर्ज कराई। आरोप है कि पुलिस ने बिना पीड़िता को बुलाए, बिना मौके का निरीक्षण किए, सिर्फ विपक्षियों को बुलाकर मनगढ़ंत रिपोर्ट लगाकर शिकायत निस्तारित कर दी।अब पीड़िता और उसकी नाबालिग बेटी को जान का खतरा है। सलमा बेगम ने पुलिस अधीक्षक लखीमपुर खीरी को प्रार्थना पत्र देकर रिजवान, अनीस, नन्हा, फुरकान, अब्बन, सभासद असफाक मंसूरी और उसके बेटे के खिलाफ बीएनएस की धारा 115(2), 126(2), 131, 331(4), 74, 75, 351(2) और पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। साथ ही नाबालिग बेटी का जिला महिला अस्पताल में मेडिकल कराने, परिवार को सुरक्षा देने और मामले की जांच राजपत्रित अधिकारी से कराने की मांग की है।सवाल सीधा है कि जब घर में घुसकर नाबालिग के कपड़े फाड़े जा रहे थे तो पुलिस कहां थी। जब पीड़िता सात दिन से थाने पर बैठी है तो FIR क्यों नहीं लिखी गई। क्या सभासद की कुर्सी कानून से बड़ी हो गई है। अगर बेटियों के कपड़े घर में नहीं बचेंगे तो थाने और कानून किसके लिए हैं।

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