धर्मस्थल पर अतिक्रमण व बन्द रास्ते के मामले में अभी तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

लखीमपुर खीरी , 22

क्या अपराधियों को मिल रहा है कोई विशेष संरक्षण या गुलाबी नोंटों की चल रही है चमक


लखीमपुर-खीरी। उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर योगी जी की सरकार धर्मस्थलों पर से अतिक्रमण हटाने व धर्मस्थलों के बन्द रास्तों को खुलवाने के लिए दिन-ब-दिन सख्ती बरत रही है तो वहीं दूसरी ओर कुछ छुटभइए किस्म के नेता अपने निजी स्वार्थवश धर्म स्थलों पर अतिक्रमण तो करवा ही रहे हैं साथ ही वहां तक जाने वाले रास्तों को भी अवैध रूप से कब्जा करवा रहे हैं।
मामला जनपद की विधानसभा क्षेत्र मोहम्मदी के ग्राम जमुका का है। यहां पर सैकड़ों वर्ष पहले ब्राह्मण समाज की एक बेटी सती हुईं थीं। जिनकी प्रसिद्धि सती बुआ के नाम से क्षेत्र में दूर-दूर तक के गांवों में थी। लेकिन आज स्थिति यह है कि मान्यता तो क्या श्रद्धालुओं को। सती बुआ का प्रसाद चढ़ाने जाना भी मुश्किल है। वहीं पास में ही एक महाभारत कालीन कुआं भी है, जिस पर शादी ब्याह में सती बुआ के साथ ही पूजा होती है। बारात जाने से पहले हिन्दू धर्म का हर लड़का पहले इस कुएं के फेरे लेता है। और जब बारात करके वापस आता है तो दूल्हा-दुल्हन वापस आते हैं तो सबसे पहले सती बुआ के दर पर अपने सुखमय भविष्य का आशीर्वाद लेने हेतु माथा टेकने जाते हैं उसके बाद ही अपने घर की चौखट के अन्दर कदम रख सकते हैं। लेकिन देविस्थान व पूजित कुएं की जमीन पर हुए अवैध कब्जे व कुछ भ्रष्टाचारियों द्वारा रास्ता बन्द कर देने से लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।। जबकि इन्हीं धर्मस्थलों के पास में होलिका दहन स्थल भी है।

*क्या है पूरा मामला:-*
शिकायतकर्त्ता देवेश कुमार मिश्रा के द्वारा दिए गए शिकायत पत्र व मौखिक जानकारी के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पहले शिकायतकर्त्ता के नाना के परिवार की एक लड़की सती हुई हैं। जिन्हें बाद में सती बुआ के नाम से प्रसिद्धि मिली। वह किन्हीं वजहों से अपने पति की मृत्यु के 6 माह बाद सती हुईं थीं। इतने दिनों बाद सती होने के कारण उन्हें अपने पैतृक घर से अत्त्यधिक उपहास व अपमान झेलना पड़ा। जिससे आहत होने के कारण सती बुआ के सती होने के समय घी-लकड़ी आदि सामग्री की सारी व्यवस्था शिकायतकर्त्ता के नाना के परिवारीजनों ने की। जिस खेत की जमीन पर बुआ माता सती हुईं, सौभाग्य से बंटवारे में वह खेत भी शिकायतकर्त्ता के नाना के हिस्से में आ गया। चूंकि शिकायतकर्त्ता की मां अपने मां-बाप की अकेली संतान हैं, इसीलिए शिकायतकर्त्ता अपने ननिहाली संपत्ति पर ही रहता है। सती बुआ देविस्थान व पूजित कुएं का सम्मान करते हुए पूर्वजों ने चकबंदी में दोनों धर्मस्थलों के अलग-अलग क्षेत्रफल व गाटा संख्या बनवा दिए। साथ ही एक नीम का पेड़ भी सती स्थान पर पूजन के लिए छोड़ दिया।
लेकिन गांव के ही एक गैरब्राह्मण समाज के लोगों ने उक्त धर्मस्थलों की जमीन पर गोबर-घूरा डालकर, गोबर के उपले व बठिया रखकर आदि तरीकों से अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं बल्कि सती देविस्थान व पूजित कुएं पर जाने वाले रास्ते को भी पूरी तरह बन्द कर दिया।
इसी बीच हाल ही में आई तेज आंधी से स्थान पर खड़ा नीम का पेड़ गिर गया। गांव के बड़े-बुजुर्गों व युवाओं से राय लेकर उनकी सहमति से शिकायतकर्त्ता ने गिरे पड़े नीम के पेड़ को बेंचकर उससे आए रुपयों से प्रशासन के सहयोग से दोनों धर्मस्थलों की पैमाईश करवाकर वहां से सभी अवैध कब्जे हटवाने, बन्द किए गए रास्ते को खुलवाने व धर्मस्थलों की बॉउंड्री बंधवाकर एक प्रवेश द्वार बनवाने का विचार किया। जिसके लिए सभी ग्रामीणों ने खुशी से अपनी सहमति दी। लेकिन अतिक्रमणकर्ता अपना कब्जा छूट जाने के डर से खुद को सत्ताधारी दल के पदाधिकारी कहने वाले कुछ छुटभैया नेताओं की सह पर अड़चनें डालने लगे। जिस पर देवेश मिश्रा ने ग्रामीणों को साथ लेकर उपजिलाधिकारी मोहम्मदी से लिखित शिकायत पत्र देकर मौके की पैमाईश कराकर अवैध कब्जा हटवाने, रास्ता खुलवाने व नीम के पेड़ की नियमानुसार बिक्री कराकर उक्त धर्मस्थलों पर बॉउंड्री करवाने की मांग की। इस सम्बंध में शिकायत किए आज कई दिन बीत जाने के बाद भी मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जबकि इधर शिकायतकर्त्ता को अपराधियों व उनके सहयोगियों से किसी भी प्रकार की हानि पहुंचने का खतरा बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि जब वर्तमान सरकार जहां एक ओर धर्मस्थलों से सख्ती के साथ अतिक्रमण हटवाकर उनके रखरखाव व सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है तो वहीं दूसरी ओर जमुका-खीरी में सतीस्थल जैसे पवित्र स्थान व महाभारत कालीन पूजित कुएं के क्षेत्रफलों को कूड़ेदान व गोबर गड्ढे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसकी लिखित शिकायत होने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
देखना यह रहेगा कि क्या उक्त प्रकरण में प्रशासन कोई सख्त कदम उठाएगा या फिर भ्रष्टाचार कायम रहेगा।

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