परिवार नियोजन का सुरक्षित और भरोसेमंद साधन है अंतरा :- डॉ अमित बाजपेई

लखीमपुर खीरी , 26

बच्चों में ‘अंतर’ रखने में कारगर है ‘अंतरा’ - सीएचसी अधीक्षक 


लखीमपुर-खीरी।परिवार में खुशहाली लाने के साथ ही विभिन्न प्रकार की शारीरिक परेशानियों से निजात दिलाने में नए अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों की अहम भूमिका है। नए गर्भनिरोधक साधनों में महिलाओं की पहली पसंद त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा बना है। जहां बच्चों के जन्म में अंतर रखने में बेहद कारगर व सुरक्षित है वहीं गर्भाशय, अंडाशय व स्तन के कैंसर से भी रक्षा करता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरधान में टेक्निकल सपोर्ट यूनिट लखनऊ  के आशीष कुमार का कहना है कि बार-बार गर्भपात, अस्पताल के चक्कर लगाने, कमजोर होती सेहत जैसी दिक्कतों से निजात पाने और परिवार में खुशहाली लाने के लिए परिवार नियोजन के नए साधन अपनाने में ही सही समझदारी है। इसके लिए वर्तमान में दो नए अस्थायी गर्भनिरोधक साधन अंतरा इंजेक्शन व छाया गोली उपलब्ध हैं। दोनों साधन जहां एक ओर दो बच्चों के जन्म में अंतर रखने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं वहीं इनके इस्तेमाल से एनीमिया व कैंसर से भी बचाव होता है। छाया गोली के सेवन से माहवारी सामान्य होती है तथा ज्यादा दिनों के अंतराल पर होती है। इससे रक्तस्राव कम होता है जो एनीमिक महिलाओं के लिए लाभकारी है। अंतरा में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स होता है जो गर्भाशय, अंडाशय व स्तन के कैंसर से बचाव में सहायक है वही अंतरा इंजेक्शन के डोज इस्तेमाल कर लोग परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी रहे हैं। यह दोनों साधन जिला चिकित्सालय सहित सभी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क उपलब्ध हैं।


इंजेक्शन लगवाने का नियम :

वही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरधान के चिकित्साधीक्षक डॉ अमित बाजपेई ने बताया कि महिला को हर 3 माह में इंजेक्शन लेना होगा। यह इंजेक्शन तब तक लेते रहें, जब तक बच्चा नहीं चाहिए। पहले व दूसरे बच्चे के बीच में अंतर करने के लिए कई दवा व अन्य तरीके पहले भी उपलब्ध हैं, लेकिन यह इंजेक्शन किसी भी दवा से बेहतर होगा। कोई भी महिला अपने पहले व दूसरे बच्चे में दो से तीन वर्ष का अंतर रखना चाहेगी, उसके लिए इंजेक्शन बहुत कारगर साबित होगा।

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