एक गौशाला ऐसी भी जहां गौसेवक के बुलाने पर दौड़कर आते हैं गाय और बछड़े

लखीमपुर खीरी , 155

(अख्तर अली)


निघासन-खीरी। जनपद लखीमपुर खीरी के विकासक्षेत्र निघासन की ग्रामपंचायत मोतीपुर में बना अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल आजकल अपनी अनूठी विशेषताओं की वजह से लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं।इंसान और जानवर के प्रेम की गहराई अगरप्रत्यक्ष दीदार करनी हो तो ग्रामपंचायत मोतीपुर की गौशाला आपका हार्दिक स्वागत करती हैं।प्रधान प्रतिनिधि कुलदीप सिंह उर्फ केडी ने गौवंश की रक्षा और सेवा की ऐसी बेहतरीन मिसाल पेश की है कि सहसा द्वापर युग की याद ताजा हो गई।वेद पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण जी की बांसुरी की धुन सुनकर गाय बछडे भगवान के पास दौडे चले आते थे,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गौवंश प्रेम भी किसी से छिपा नहीं हैं,लेकिन मोतीपुर के प्रधान प्रतिनिधि कुलदीप की रोजगारपरक  गौसेवा अविस्मरणीय हैं,मनुष्य और पशु के बीच प्रेम का ऐसा बंधन देखकर अन्तर्मन सहसा द्रवित हो जाता हैं।याद कीजिए वर्ष 2023  का वो समय जब छुटृटा गौवंश की वजह से किसानो में त्राहि त्राहि मची हुई थी।गांव में बढती हुई छुट्टा गौवंश की समस्या और किसानो की फसलों को हो रहे नुकसान को देखते हुए प्रधान प्रतिनिधि कुलदीप सिंह ने अपनी 10 बीघा जमीन निशुल्क रुप से गोशाला संचालित करने के लिए दे दी।कुलदीप सिंह की इस पहल से ग्रामीणों को बहुत राहत मिली।इसी क्रम में 21 जनवरी 2024 को पूर्व केंद्रीय ग्रह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी द्वारा मोतीपुर में अस्थायी गौवंश आश्रय स्थल कि भव्यता से उद्घाटन किया गया।उद्घघाटन के अवसर पर विशाल भंडारा आयोजित किया गया।इस गौशाला की सबसे खास बात यह हैं,कि कुलदीप ने सभी पशुओं का नामकरण कर दिया हैं,हैरत की बात यह है कि प्रधान प्रतिनिधि जिस गाय या बछडे को नाम लेकर बुलाते हैं वही दौडकर पास आ जाता हैं। कुलदीप रोज सुबह गौशाला में आकर गायों को चारा खिलाते हैं और पुचकारते हैं।गौवंश को पर्याप्त पोषण देने के लिए दो एकड भूमि पर चारे की व्यवस्था की गई हैं।गौवंश की सुरक्षा के लिए गौशाला में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं ताकि गौशाला की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।प्रधान प्रतिनिधि ने गौशाला के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूह के लिए रोजगार के दरवाजे खोल दिए हैं।प्रधान प्रतिनिधि कुलदीप ने बताया कि गौशाला में एकत्र होने वाले गोबर को वह समूह की महिलाओं को उपलब्ध कराते हैं समूह की महिलाएं उससे जैविक खाद बनाकर किसानों को खेती में उपयोग हेतु बिक्री करती हैं। महिलाओं को आर्थिक दृष्टि से मोतीपुर की गौशाला मजबूत बना रही हैं,अगर क्षेत्र की सभी गौशालाएं मोतीपुर गौशाला माडल को अपना लें तो इलाके की सूरत बदल सकती हैं।  वास्तव में मोतीपुर की गौशाला सम्पूर्ण जनपद के लिए रोजगारपरक गौवंश संरक्षण की अद्भुत मिसाल बन चुकी हैं।

Related Articles

Comments

Back to Top