कंबल घोटाले में वकील हड़ताल पर कंछल गुट भी‌ वकीलों के‌ साथ

लखीमपुर खीरी , 155

पलिया कलां लखीमपुर खीरी। अधिवक्ताओं का कार्य बहिष्कार जारी, व्यापार मंडल भी उतरा समर्थन में, तहसील परिसर से नगर में निकाला पैदल मार्च,
पलिया तहसील में गरीबों के लिए आए कंबलों के कथित घोटाले का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 
      13 जनवरी की शाम उजागर हुए इस प्रकरण ने अब प्रशासन और अधिवक्ता संघ के बीच टकराव का रूप ले लिया है। अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन के बीच गुरुवार को नगर व्यापार मंडल ने भी खुलकर अधिवक्ताओं का समर्थन कर दिया।ज्ञात हो कि बीती 13 जनवरी की शाम करीब सात बजे तहसील परिसर में गरीबों में वितरण के लिए रखे गए कंबलों को एक ई-रिक्शा पर लादकर कथित रूप से बाहर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रदीप मेनरो ने मौके पर पहुंचकर ई-रिक्शा को रुकवाया और कंबलों की अवैध निकासी का आरोप लगाया। मामले के सामने आते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और कंबलों को बाहर ले जाने की कोशिश पर तत्काल रोक लग गई।
मामला उजागर होने के बाद पलिया लेखपाल संघ की ओर से अधिवक्ता संघ अध्यक्ष प्रदीप मेनरो सहित 11 अन्य अधिवक्ताओं के खिलाफ पलिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया गया। 
      मुकदमे की जानकारी मिलते ही तहसील के समस्त अधिवक्ता आक्रोशित हो उठे और बुधवार को न्यायिक व राजस्व कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करते हुए तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।अधिवक्ताओं का आरोप है कि पूरे प्रकरण में तहसील प्रशासन, विशेषकर उप जिला अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। बिना निष्पक्ष जांच के अधिवक्ताओं को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है,अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि कंबलों को बेचने या हटाने की कोई मंशा नहीं थी, तो फिर उन्हें देर शाम चोरी-छिपे ई-रिक्शा पर लादकर बाहर क्यों ले जाया जा रहा था।
गुरुवार को आंदोलन को और बल तब मिला, जब नगर व्यापार मंडल भी अधिवक्ताओं के समर्थन में उतर आया। व्यापारियों और अधिवक्ताओं ने संयुक्त रूप से तहसील परिसर से नगर में पैदल मार्च निकाला और “एसडीएम मुर्दाबाद” व “तहसील प्रशासन मुर्दाबाद” के नारे लगाए। प्रदर्शन कारियों ने लेखपाल संघ द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे को तत्काल वापस लेने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं और व्यापारियों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए उप जिलाधिकारी के तत्काल स्थानांतरण की भी मांग उठाई। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक मुकदमा वापस नहीं लिया जाता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कुल मिलाकर कंबल वितरण से जुड़ा यह मामला अब गंभीर प्रशासनिक संकट का रूप ले चुका है। अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार के चलते तहसील का कामकाज बुरी तरह प्रभावित है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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