ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी _
Jun 02, 2021 at 01:17 PM , 491उतर रहा प्रावृष का विभव धीरे-धीरे विटप-राशि भीजती जाती। उत्संग में सो रहा मेरा मस्तक बार-बार गवाक्ष की ओर देखता। मेघों की अतिशयता इन अभिनील आँखों के आगे क्या ? चपला की चमक भी फीकी। विविधवर्णी व्योम मन ...














































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