अद्भुत रेत : संगीत पैदा करने वाला रेत

परिवेश , 479

 राजस्थान के बाड़मेर की एक अजीब कहानी है . सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन थार के रेगिस्तान में स्थित एक रेतीले धोरे की मिट्टी से संगीत की स्वर लहरिया निकलती है. मौसम के साथ-साथ आवाज तेज-धीमी होती रहती है. यह धोरा बाड़मेर से अस्सी किलोमीटर दूर स्थित सेतराऊ गांव में स्थित है. खास बात यह है कि आसपास के अन्य धोरों से किसी प्रकार की आवाज़  नहीं निकलती. एक बार भू-  वैज्ञानिक भी इस धोरे की रेत का परीक्षण कर गए, लेकिन संगीत निकलने के रहस्य  तक नहीं पहुंच पाए.

राजस्थान के बाड़मेर से अस्सी किलोमीटर दूर स्थित सेतराऊ गांव में पहाड़ों के निकट यह धोरा स्थित है.  इसकी मिट्टी को खिसकाने या इस पर फिसलने के समय अलग-अलग तरह की संगीत की ध्वनि  सुनाई देती है. मिट्टी हवा में उछालने के बाद वापस हाथ पर गिरने के समय भी ये सुनाई देता है.
 सैकड़ों फीट लंबे चौड़े इस धोरे के कुछ हिस्से में ही यहां यह संगीत की आवाज़ सुनाई देती है.

सर्दी के दिनों में संगीत की ध्वनि कम हो जाती है। वहीं गर्मी बढ़ने के साथ ही तेज होती जाती है  बीस साल पहले दिल्ली से आए वैज्ञानिकों के दल ने इसकी जांच की. वे इसकी मिट्टी भी अपने साथ ले गए.
यह टीम भी इसका खुलासा नहीं कर सकी कि आवाज कैसे आती है.

अदभुत रेत की इस संगीत को सुनने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पर  आते हैं.
कुछ साल पहले क्षेत्र के लोगों ने इस धोरे की मिट्टी को पर्यटकों के बीच बेचना शुरू कर दिया था. उन्होंने अब इस पर रोक लगा दी.
 गांव वालों का कहना है कि यह इस धोरे से आवाज करीब पचास वर्ष से सुन रहे हैं. गाँव वालों का कहना है कि गर्मी के दिनों में इसकी आवाज काफी दूरी तक सुनाई देती है .

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