*परिवर्तन की जड़ें: ई-गवर्नेंस से बदलता ग्रामीण भारत*

जनपत की खबर , 25

- प्रो. एस. पी. सिंह बघेल
(लेखक केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री हैं।)
 
कुछ क्षण केवल एक उपलब्धि भर नहीं होते, वे एक पूरी यात्रा को रोशन कर देते हैं। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के लिए चार पंचायती राज पहलों का चयन ऐसा ही एक क्षण है, ऐसा क्षण जो किसी एक कार्यालय का नहीं, बल्कि हर ग्राम पंचायत और हर उस नागरिक का है, जिसने डिजिटल रूप से सशक्त ग्रामीण भारत के सपने पर भरोसा किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि से प्रेरित होकर, भारत की पंचायतें भरोसे, तकनीक और परिवर्तन का एक नया अध्याय लिख रही हैं।
 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन के बारह परिवर्तनकारी वर्षों के इस पड़ाव पर यह सम्मान विशेष महत्व रखता है। यह दर्शाता है कि किस प्रकार पंचायती राज संस्थाएं मात्र योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित निकायों से आगे बढ़कर, शासन की तीसरी स्तरीय व्यवस्था की आत्मविश्वासी, सक्षम और तकनीकी रूप से दक्ष संस्थाओं के रूप में स्थापित हुई हैं।
 
प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा स्थापित राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से उत्कृष्ट लोक सेवा वितरण के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान है। इस वर्ष सात श्रेणियों में चयनित 17 परियोजनाओं में से 4 पंचायती राज क्षेत्र से संबंधित हैं, जो ज़मीनी स्तर पर नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण बनाने हेतु पिछले बारह वर्षों के निरंतर प्रयासों का स्वाभाविक परिणाम है।
 
ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन के मूल्यांकन हेतु पंचायती राज मंत्रालय की प्रमुख पहल, पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI), को डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन की श्रेणी में स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इस सूचकांक के आने से पहले, देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए कोई मानकीकृत, डेटा आधारित राष्ट्रीय ढांचा उपलब्ध नहीं था। आज यह सूचकांक डेटा, प्रदर्शन, पहचान और जनभागीदारी को आपस में जोड़ने वाली एक पारदर्शी जवाबदेही व्यवस्था का निर्माण कर रहा है।
 
उल्लेखनीय यह है कि दो ग्राम पंचायतों ने अपने स्वयं के प्रयासों से यह सम्मान अर्जित किया है। महाराष्ट्र के सांगली जिले की कडेपुर ग्राम पंचायत ने ग्रासरूट स्तर की पहलों की श्रेणी में स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त किया है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से 1,300 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं, पश्चिम त्रिपुरा की बिजय नगर ग्राम पंचायत को रजत पुरस्कार मिला है। पंचायत ने अपने स्वयं के स्रोतों से आय में लगभग 194 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और महिलाओं के बीच शत-प्रतिशत डिजिटल साक्षरता हासिल की है। महाराष्ट्र के नंदुरबार जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग को ‘ई-आरोग्य धमनी’ पहल के माध्यम से दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए जिला स्तरीय पहल श्रेणी में गोल्ड अवार्ड के लिए चयनित किया गया।
 
ये पुरस्कार मिलकर एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। ई-गवर्नेंस में उत्कृष्टता अब केवल राज्यों की राजधानियों या जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह समान रूप से हमारे गांवों और ग्राम सभाओं में भी स्थापित हो चुकी है। इस वर्ष 30 राज्यों की 1.65 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने इसमें भाग लिया, जो हमारे द्वारा मिलकर तैयार की गई संस्थागत क्षमता और विश्वास को दर्शाता है।
 
यह उपलब्धि संयोग से नहीं मिली है। पिछले बारह वर्षों में मंत्रालय ने पंचायतों को निरंतर बेहतर साधन उपलब्ध कराए हैं। ई-ग्राम स्वराज प्लेटफॉर्म के माध्यम से 2.59 लाख से अधिक पंचायतों में योजना निर्माण, बजट और भुगतान प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया गया है, जिससे पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से ₹3.16 लाख करोड़ से अधिक के ऑनलाइन लेन-देन संभव हुए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सभासार प्लेटफॉर्म, जो 23 भारतीय भाषाओं में कार्य करता है, अब 1.35 लाख से अधिक पंचायतों में चंद मिनटों में ग्राम सभा की कार्यवाही तैयार कर देता है। मेरी पंचायत ऐप, जिसे 1 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है, विकास कार्यों की जानकारी सीधे नागरिकों तक पहुंचा रहा है।
 
इन प्रयासों के साथ-साथ, स्वामित्व योजना के तहत 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है तथा जून 2026 के मध्य तक 1.94 लाख गांवों के लिए 3.19 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों के संपत्ति अधिकार सुदृढ़ हुए हैं और उन्हें ऋण सुविधा प्राप्त करने में आसानी हुई है। पंद्रहवें वित्त आयोग की अवधि में ग्रामीण स्थानीय निकायों को ₹2.82 लाख करोड़ की अनुदान राशि जारी की गई, जो अब तक की सर्वाधिक है। सोलहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2026 से 2031 के लिए ₹4.35 लाख करोड़ की सिफारिश की है, जो लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
 
इस सोच को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने 'सेवा से समृद्धि: पंचायतों के नेतृत्व में सेवा वितरण' विषय पर क्षेत्रीय कार्यशालाओं की एक श्रृंखला शुरू की है। इन कार्यशालाओं में पंचायत प्रतिनिधि, जिला स्तरीय अधिकारी और विषय विशेषज्ञ मिलकर स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में लोगों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं। इन कार्यशालाओं के माध्यम से सफल स्थानीय पहलों और नवाचारों को साझा किया जा रहा है, ताकि राज्य एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें और अच्छे मॉडलों को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके। इनकी उपयोगिता और विस्तार की संभावनाएं बहुत व्यापक हैं। NAeG 2026 में चयनित पंचायती राज संस्थाओं की उपलब्धियां देशभर की पंचायतों को प्रेरित कर रही हैं, और अनेक पंचायतें अपने गांवों में बेहतर सेवाएं पहुंचाकर समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने के लिए ऐसे मॉडलों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सदैव यह बल देते रहे हैं कि सुशासन वही है जो नागरिकों का जीवन सरल बनाए। पारदर्शी और तकनीक सक्षम व्यवस्थाओं के माध्यम से प्राप्त 'ईज़ ऑफ़ लिविंग' ही किसी सरकार की मंशा और क्षमता की सच्ची कसौटी है। यह एक सार्वभौमिक सत्य है कि दूसरों का सम्मान करना स्वयं के सम्मान का मार्ग प्रशस्त करता है। पंचायतों को डिजिटल साधनों से सशक्त बनाकर और उनकी क्षमता पर विश्वास जताकर, केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण मंच पर देश को सम्मानित होने का मार्ग प्रशस्त किया है।
 
जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, सशक्त पंचायतों की भूमिका और भी केंद्रीय होती जा रही है। लगभग 90 करोड़ नागरिकों के ग्रामीण भारत में निवास करने के साथ, हमारी पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती ही हमारी सामूहिक प्रगति की गति तय करेगी। विकसित पंचायत, विकसित भारत से अलग नहीं, बल्कि उसकी सबसे मजबूत नींव है।
 
ये चार राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार बेहतर प्रदर्शन, प्रगति और निरंतर आगे बढ़ने के प्रतीक हैं। ये जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे प्रत्येक सरपंच, पंचायत सचिव और महिला जनप्रतिनिधि के लिए एक प्रेरणा हैं कि उनके समर्पण और प्रयासों को पहचान मिल रही है, उनकी सराहना की जा रही है और उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। बारह वर्षों के निरंतर प्रयासों ने ही ऐसी उत्कृष्टता के उभरने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। NAeG 2026 में मिली पहचान से लेकर देशभर में बढ़ती सेवा से समृद्धि कार्यशालाओं की गति तक, यह सफलता इस बात की पुष्टि करती है कि ग्रामीण भारत में ई-गवर्नेंस की जड़ें वास्तव में गहरी हो चुकी हैं, और विकसित पंचायत के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण की यह यात्रा हर गुजरते वर्ष के साथ और सशक्त होती जा रही है।

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