*मोदी सरकार के 8 साल: दशकों पुरानी शासन व्यवस्था को शीर्षासन कराती एक ज़बरदस्त शुरुआत*
परिवेश Jun 05, 2022 at 11:43 AM , 590*-राजीव चंद्रशेखर, राज्य मंत्री. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, कौशल विकास और उद्यमिता, भारत सरकार*
छह दशकों से चली आ रही कांग्रेसी नीति से थके हुए भ्रष्ट गठजोड़ और एक वंश की राजनीति को दरकिनार करते हुए देश ने 8 साल पहले 2014 में शासन की बागडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी। प्रधानमंत्री मोदी ने परिवर्तन का वादा किया, उन्होंने शासन में एक नई दिशा का वादा किया और पिछले 8 वर्षों ने उन्हें नए भारत के निर्माण की दिशा में लगातार और पूरी दृढ़ता से सतत आगे बढ़ते देखा है।
2014 से पहले, भारत का चित्रण दुनिया के लिए केवल ‘एक बड़े बाजार अवसर’ के रूप में था। मगर यह अवसर भी लचर शासन व्यवस्था, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, नीतिगत विसंगतियों, लालफीताशाही घोर अवसरवादी पूंजीवाद और घोटालों के आवरण के साथ था। हालाँकि यह स्थिति 80 के दशक में सामान्य रूप से तब और भी स्वीकार्य सी मान ली गयी थी जब तत्कालीन प्रधानमन्त्री राजीव गांधी ने खुद स्वीकार किया था कि दिल्ली से चलने वाले हर एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही वास्तव में नागरिकों तक पहुंचते हैं।
मोदी-पूर्व भारत में, राजनीतिक रूप से जुड़े केवल कुछ परिवारों और समूहों ने सभी अवसरों और पूंजी पर आधिपत्य सा जमा रखा था और उनसे अलग भारतीयों का विशाल समुदाय अपनी चाहत के बावजूद प्रगति करने के अवसर और पहुँच से वंचित था। उदाहरण के लिए ‘क्रेडिट सुइस’ संस्था की 'हाउस ऑफ डेट' नाम की एक रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि भारत की संपूर्ण बैंकिंग प्रणाली की कुल संपत्ति का 98% भारत में 10 प्रभावशाली परिवारों के क़ब्ज़े में कर लिया गया था। उद्यमिता और सफल स्टार्टअप के तो कोई मानक तक नहीं थे हाँ सफलता के कुछ दुर्लभ अपवाद ज़रूर थे।
अगर बोलचाल की भाषा में कहें तो तब भारत राष्ट्र के रूप में एक “हाथी” के रूप में जाना जाता था - भारी भरकम, बहुत बोझिल और धीमी गति से चलने वाला हाथी। तब कर संग्रह से हमारा राजस्व कम हुआ करता था और अन्य प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में हमारा कर- जीडीपी अनुपात भी बहुत कम हुआ करता था ।
2014 में, भारत के नागरिकों ने 2004-14 के दशक के विकास को खोने की भरपाई के रूप में एक बदलाव के लिए मतदान किया और नरेंद्र मोदी को एक शानदार जनादेश दिया। उस मोदी को जिसे लोगों ने एक गरीब परिवार से गुजरात के सीएम बनने तक का सफर कड़ी मेहनत और सेवा भावना के साथ तय करते देखा था। गुजरात में उन्होंने साबरमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट जैसी बहुवर्षीय परियोजनाओं के साथ अल्पकालिक लोकलुभावनवाद के बजाय मध्यम से दीर्घकालिक परिवर्तन पर ध्यान देकर अपनी राजनीतिक और शासन की सोच में विपरीत दिशा में चलकर सार्थक परिणामों का प्रदर्शन किया था। अपनी इसी कार्यपणाली के लिए उन्हें 2019 में और फिर कई राज्यों के चुनावों में लगातार जनादेश मिला है जो 2014 के जनादेश से भी विशाल है।
अपने पहले 3-4 साल उन्होंने अर्थव्यवस्था के गहरे घावों को ठीक करने, शासन की संस्थाओं पर लगे दागों और नुकसानों को दुरुस्त करने में तथा सरकार में नागरिकों के खोए हुए विश्वास को फिर से बहाल करने में लगाए। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक बिखरती अर्थव्यवस्था, ध्वस्त बैंकिंग तथा वित्तीय क्षेत्र और एक पूरी तरह अनुत्तरदायी व जर्जर सरकारी मशीनरी विरासत में मिली थी। उन्होंने अर्थव्यवस्था, वित्तीय क्षेत्र, निवेशकों के विश्वास और सरकार में विश्वास के पुनर्निर्माणके लिए लगातार काम किया। उन्होंने सरकार के भीतर कार्य संस्कृति को बदल दिया है - सरकार के काम को वास्तव में एक सतत कर्म और इसे भारतीयों के लिए परिवर्तन और समृद्धि का अथक धर्मयुद्ध बना दिया है।
ऐसे अनगिनत सुधार, प्रशासनिक नवाचार और पहलें हैं जिन्होंने भारत को अपनी वर्तमान सामर्थ्य की दशा तक सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। लेकिन इसके बहुत पहले ही प्रौद्योगिकी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, भारत और भारतीयों के लिए अवसरों के बारे में उनकी दृष्टि और गहरी रूचि का प्रमाण है। पीएम मोदी का शुरू किया गया डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ऐसा ही एक उदाहरण है।
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम तीन स्पष्ट उद्देश्यों के साथ शुरू किया गया था। पहला और सबसे महत्वपूर्ण था- नागरिकों के जीवन, शासन और लोकतंत्र को बदलना, दूसरा- डिजिटल अर्थव्यवस्था, नौकरियों, अवसरों और निवेशों का विस्तार करना और तीसरा, प्रौद्योगिकी के भविष्य में देश का एक नेता के रूप में उभरना यानी भारत का भविष्य की प्रौद्योगिकियों के केवल उपभोक्ता के बजाय स्वयं एक स्रोत बनना।
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की उपलब्धता इसके प्रत्येक उद्देश्य की बड़ी प्रगति को दर्शाती है। उदाहरण स्वरुप अब. दिल्ली से जारी एक-एक रुपया बिना किसी देरी या भ्रष्टाचार के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचता है। सरकार ने अब तक बिना किसी रिसाव या बिचौलियों के डीबीटी के माध्यम से 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हस्तांतरण लाभार्थियों को सीधे किया है इससे जहाँ 2.2 लाख करोड़ रुपये की बचत होसकी है, वहीँ यह पुरानी मान्यता कि ‘सरकार की मशीनरी में रिसाव रोक पाना असंभव है’ भी ग़लत साबित हो चुकी है।
आज, भारत में दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला और सबसे जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जिसमें लगभग 70,000 पंजीकृत स्टार्टअप और 100 यूनिकॉर्न हैं और हर हफ्ते एक नए यूनिकॉर्न का जन्म होता जा रहा है। इन स्टार्टअप्स के विकास पथ को उनकी कड़ी मेहनत, जुनून, नवाचार करने की क्षमता और पूंजी की उपलब्धता ने शक्ति दे रखी है न कि पहले की तरह राजनीतिक कनेक्शन या विशेष पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ाव और केवल कुछ चुनिंदा लोगों के लिए ही अवसरों की उपलब्धता। बल्कि अब तो ऐसे विचारों को ही शीर्षासन करना पड़ रहा है।
भला हो जीएसटी और कर अनुपालन के माध्यम से अप्रत्यक्ष कराधान में सबसे महत्वपूर्ण सुधारों का जिसके कारण भारत ने कर राजस्व से वित्त वर्ष 21 में 22 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 22 में 27 लाख करोड़ रुपये के रूप में अब तक का सबसे अधिक कर संग्रह दर्ज किया है, जिसमें 22% की वृद्धि दर्ज की गई है। जिससे “कम कर राजस्व और खर्च करने की सरकारों की सीमित क्षमता” का एक और पुराना मिथक चकनाचूर हो गया है । इस वर्ष अकेले भारत सरकार बुनियादी ढांचे के निर्माण में 7.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर रही है - आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर नए भारत में निवेश - और साथ ही एक अभूतपूर्व संख्या क्यूंकि ढांचों के निर्माण में कम व्यय कभी सामान्य बात हुआ करती थी।
वास्तव में, जब दुनिया सबसे भयानक महामारी की घटना - कोविड की चपेट में थी, तो इसने दुनिया भर के नेतृत्व के सामने खरे उतरने का एक भारी टेस्ट पेश किया क्योंकि सभी राष्ट्रों को अपने नागरिकों के जीवन और उनकी आजीविका बचाने के लिए इस अप्रत्याशित खतरे से निपटना एक बहुत ही बड़ा काम था। आज दुनिया की महाशक्तियां जहाँ तीसरी और चौथी लहर से जूझ रही हैं, भारत, पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, एक ऐसे लचीले राष्ट्र के रूप में उभरा जिसने दुनिया के सबसे बड़े स्वैच्छिक और तकनीक संचालित टीकाकरण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक चलाकर अपने नागरिकों को 200 करोड़ से अधिक टीकाकरण शॉट्स दिए। भारत ने अपने छोटे व्यवसायों और अपने गरीबों की रक्षा की। कोविड महामारी के दौरान शुरू हुई पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना - पीएमजीकेएवाई दुनिया का सबसे बड़े खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम है जिसके तहत गरीबों को खाद्यान्न प्राप्त करना अभी भी जारी है। एक ओर जहां दुनिया की बहुत सी अर्थव्यवस्थाएं लड़खड़ा उठी हैं और हांफते कांपते चल रही हैं पीएम मोदी की स्थिर आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती एक प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है, जो अब तक के सबसे अधिक एफडीआई (यूएस $ 83.57 बिलियन) को आकर्षित कर रहा है। भारत ने अब तक के सबसे अधिक माल निर्यात व सेवा निर्यात में नए रिकॉर्ड बनाए हैं जो क्रमशः $400 बिलियन और सेवा निर्यात $ 254 बिलियन हैं।
डिजिटल इंडिया ने महामारी से निपटने में बहुत बड़ी और सार्थक भूमिका निभाई है। इसने सुनिश्चित किया कि सरकार देश के सुदूर हिस्सों में भी लोगों तक आसानी से पहुंच सके। स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाएं तेजी से ऑनलाइन माध्यम वाले मोड में चली गईं। यह कहना गलत नहीं होगा कि कोविड के बाद, भारत एक ऐसी लचीली अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरा जिसने नागरिकता और सुशासन के लिए प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग में एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में अपना स्थान बनाया।
पीएम नरेंद्र मोदी के न्यूइंडिया के भविष्य पर अथक परिश्रम और ध्यान केंद्रित करने के चलते भारत पोस्ट कोविड दुनिया के लिए एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभरा है और हम अपनी महत्वाकांक्षाओं और रोडमैप को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए फिर से तैयार कर रहे हैं। दुनिया के तेजी से डिजिटलीकरण के साथ-साथ डिजिटल उत्पादों और सेवाओं के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विश्वास पर एक नये सिरे से ध्यान केंद्रित करने से भारत के लिए सामान्य रूप से और हमारे युवाओं के लिए विशेष रूप से जबरदस्त अवसर प्राप्त हुआ है। पीएम नरेंद्र मोदी ने आने वाले दशक को नए भारत का तकनीकदशक या Techade बताया है। पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार की पिछले 8 वर्षों की समर्पित कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप युवा भारतीयों, स्टार्टअप्स को भारत के इतिहास में अभूतपूर्व अवसर प्राप्त हो रहे हैं और अब सबके सामूहिक प्रयासों और “सबका साथ” लेकर नए मज़बूत भारत की आर्थिक क्षमता और निहित संभावना के अवसर को साकार करना हम सभी की ज़िम्मेदारी है।






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